Thursday, April 22, 2021
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कैंसर होने के बावजूद भी नहीं टूटे हौंसले, शुरू किया खुद का NGO अब रोज़ाना जरूरतमंद बच्चों को खिलाती हैं मुफ्त खाना

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एक नारी अपने अस्तित्व की रक्षा करते हुए पूरे विश्व से कहती है कि नहीं बदल सकते हम खुद को औरों के हिसाब से, एक लिबास हमें भी दिया है खुदा ने अपने हिसाब से| आज बेशक विश्व अपना विकास कर चुका है लेकिन जब बात औरतों की आती है तो यही विकसित विश्व वर्तमान में भी कहीं न कहीं रूढ़िवादी धारणाओं से जकड़ा हुआ है| आज बेशक महिलाओं और पुरुषों को हर क्षेत्र में समान दर्जा दिया जाता है लेकिन औरतों के प्रति सम्मान की भावना आज भी देखने को नहीं मिलती| आइए जानते हैं एक ऐसी महिला के बारें में जिसने कैंसर होते हुए भी हार नहीं मानी और बन गई बच्चों की “superdidi”

facebook/anchalsharma

बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा आंचल का सफर

आंचल शर्मा दिल्ली की रहने वाली और बहुत ही धैर्यशील महिला हैं| आंचल आज एक बिज़नस वुमेन, सामाजिक कार्यकर्ता और साथ ही बच्चों की “superdidi” हैं| आंचल का यह सफर बहुत ही मुश्किल था| आंचल ने बचपन से ही आर्थिक संकटों का सामना किया है| आंचल के पिता एक ऑटो चालक थे जो शराब का सेवन किया करते थे| जिसके कारण वह जो भी कमाते थे उसे वह शराब पीने में ही व्यर्थ कर देते थे| घर की आर्थिक स्थिति के कारण आंचल और उनके भाई ने बचपन में ही अपनी पढ़ाई भी छोड़ दी थी|

घर में खाने के थे लाले इसलिए आंचल ने शुरू की नौकरी लेकिन…..

आर्थिक संकटों के कारण आंचल का परिवार रोटी पर पानी और मिर्च लगाकर खाया करता था| इस आर्थिक संकट से निपटने के लिए आंचल की माँ ने नौकरी करना शुरू किया लेकिन कुछ समय बाद उन्हें भी नौकरी से निकाल दिया गया| उसके बाद आंचल और उनके भाई ने भी नौकरी करना शुरू कर दिया था, लेकिन डिग्री न होने के कारण आंचल को मात्र 4 हज़ार रुपए मिलते थे| उसके बाद आंचल ने रियल- एस्टेट में एजेंट के तौर पर काम किया लेकिन उसमें उन्हें 2 लाख रूपये की धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा|

facebook/anchalsharma

शुरू की खुद की कंपनी लेकिन करनी पड़ी बंद

इसी बीच आंचल ने भी खुद की कंपनी को शुरू किया, जिसमे लोगों का काफी अच्छा रिस्पोन्स मिला लेकिन तभी उनके माता-पिता ने उन्हें शादी करने के लिए कहा और उनकी शादी एक दिव्यांग व्यक्ति से करा दी| लेकिन वहाँ भी वह घरेलू हिंसा का शिकार हो जाती हैं, इसके बाद वह खुद के भविष्य के लिए कदम उठाती हैं और अपने ससुराल वालों के खिलाफ केस दर्ज करा देती हैं|

माता-पिता की सेवा में नहीं रखा खुद के स्वास्थ्य का ध्यान, हो गया खुद को कैंसर

2008 में वह अपने ससुराल वालों से अलग हो गईं थी, लेकिन कठिनाइयों ने अभी भी सुपर वुमेन का पीछा करना नहीं छोड़ा था| इसी बीच उनके माता-पिता की तबीयत भी खराब होने लगी, अपने माता-पिता की देखभाल में आंचल ने खुद का स्वास्थ्य भी अनदेखा कर दिया और पता चला कि उन्हें भी ब्रेस्ट कैंसर हो चुका है और वह अब तीसरी स्टेज पर है| लेकिन सुपर वुमेन हार मानने वालों में से नहीं थी| वह खुद अपना इलाज अकेले कराने जाती हैं और इसी के साथ उन्होंने अपनी “cancer heros venture pvt ltd” नाम से एक कंपनी भी शुरू की|

बच्चों को खिलाती हैं मुफ्त में खाना, खोला खुद का एक NGO

एक खास-बातचीत में आंचल ने बताया कि एक बार वह अपने कैंसर का इलाज कराकर वापस घर आ रही थी, तभी उन्होंने कुछ बच्चों को खाने के लिए भीख मांगते हुए देखा| तभी से वह रोज़ाना करीब 200 जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में खाना खिलाती हैं| बच्चें भी आंचल को superdidi कहकर बुलाते हैं| इसी के साथ उन्होंने अपना एक NGO भी खोला जिसका नाम उन्होंने “Meals Of happiness” रखा| उनके इस सराहनीय कार्य के लिए मैक्स अस्पताल भी आंचल को “निडर हमेशा” नाम के पुरस्कार से सम्मानित कर चुका है|

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