Wednesday, May 19, 2021
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छोटे से बिजनेस को पहुंचाया उचाइंयों पर, आज करते है लाखों दिलों पर राज

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हम सभी जानते हैं भोजन हम सभी की मूलभूत आवश्यकता है और यदि खाना घर का हो तो इससे अच्छी बात तो हो ही नहीं सकती| लेकिन आज भी कई लोग हैं जिनको अनेकों कारणों से घर का खाना नहीं मिल पाता| लेकिन आज जिसके बारें में हम आपको बताने जा रहे हैं, वह इन लोगों के लिए मसीहा बन चुके हैं| अभी तक शायद आप समझ ही गए होंगे, जी हाँ यहाँ बात मुंबई डिब्बावाला की ही हो रही है| क्यूंकि जब भी भारत में खाने की बात होती है तो मुंबई डिब्बावाला की चर्चा होना स्वाभाविक है| आज हम मुंबई डिब्बावाला की सफलता की कहानी बताने जा रहें हैं कि कैसे इन्होंने सफलता के मूल मंत्रों को अपनाकर लाखों लोगों के दिलों को जीत लिया हैं|

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130 साल पुराना है डिब्बावाला बिज़नस, सभी कर्मचारी हैं कंपनी के मालिक
डिब्बावाला बिज़नस आज या कुछ साल पहले का नहीं है| यह 130 साल पुराना है| आज से 130 साल पहले 1890 में महादेव हवाजी ने 100 लोगों के साथ मिलकर इस बिज़नस को शुरू किया था और वह अंग्रेजों का जमाना था| ऐसे में भी लोगों ने महादेव हवाजी के इस विचार और सोच को अपना समर्थन दिया| 1930 में महादेव हवाजी ने संगठित रूप में कार्य करना शुरू कर दिया था| उसके बाद 1956 में नूतन टिफिन बॉक्स सप्लायर्स के नाम से एक चैरिटेबल सोसाइटी शुरू की| डिब्बावाला में 130 साल पहले भी और आज भी कोई एक व्यक्ति मालिक नहीं है, सभी लोग संगठित होकर कार्य करते हैं और सभी को कंपनी का मालिक समझा जाता है|

सफलता के मूल मंत्र को अपनाकर जीत लिए लाखों दिल
मुंबई डिब्बावाला अपने काम के प्रति बहुत ही सजक हैं, साथ ही वह ग्राहक को भगवान मानते हैं और समय के एक दम पाबंद हैं| यही सफलता के मूल मंत्र हैं| आज भी एक बार के लिए ट्रेन या फ्लाइट देरी कर सकते हैं लेकिन मुंबई डिब्बावाला हमेशा समय पर ही खाना पहुंचाते हैं| आज तक कभी भी मुंबई डिब्बावाला ने कोई भी हड़ताल नहीं की है| एक बार प्रिंस चार्ल्स उनसे मिलने आए लेकिन मुंबई डिब्बावाला ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया क्यूंकि यदि वह पहले उन्हें समय देते तो शायद उन्हें खाना पहुँचाने में देरी हो सकती थी| उसके बाद लंच टाइम पर मुंबई डिब्बावाला प्रिंस से मिले| उनके इस जज़्बे को देख प्रिंस भी बहुत खुश हुए|

आज मिल चुके हैं गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, सिक्स सिग्मा अवार्ड जैसे बड़े सम्मान
आज जो बिज़नस 100 डिब्बों से शुरू हुआ था आज वह 2 लाख डिब्बों तक पहुँच चुका है| यह सिर्फ डिब्बावाला के समर्पण का परिणाम है| डिब्बावाला खाना पहुंचाने के 500-600 रूपये प्रतिमाह लेते हैं| साथ ही डिब्बावाला अपने कर्मचारी को 10 से 15 हज़ार रूपये प्रतिमाह वेतन देते हैं| बेशक शायद वेतन के पैसे कम हैं लेकिन काम में संतुष्टि है| आज मुंबई डिब्बावाला के इसी समर्पण के लिए उनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया जा चुका है साथ ही उन्हें सिक्स सिग्मा अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है| मुंबई डिब्बावाला के समर्पण को देखते हुए उन्हें बिना आवेदन के आईएसओ सर्टिफिकेट भी मिला हुआ

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