Saturday, November 27, 2021
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दीये की रोशनी में की पढ़ाई, 24 बार असफलता को हरा कर बन चुके हैं सरकारी अफसर

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माना जाता है कि संघर्ष के सर्वोच्च शिखर पर सफलता होती है| यदि आपको सफलता हासिल करनी है तो आपका संघर्ष भी उतना ही कठिन करना होगा| कहते हैं कि जिस प्रकार एक बार दीया जलाकर बुझा देने से अंधकार दूर नहीं होता उसी प्रकार एक बार प्रयास करने से सपना पूरा नहीं होता| आज की कहानी एक ऐसे ही शक्स की है जिसने हमेशा अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित रखा और अपने सपनों को पूरा किया|

facebook/premkumawat

संघर्ष की मिसाल हैं प्रेम

हनुमानगढ़ के रहने वाले प्रेम कुमावत आज संघर्ष की मिसाल बन चुके हैं| प्रेम एक किसान परिवार से हैं और बहुत ही मेहनती और बुलंद हौंसलों वाले व्यक्ति हैं| प्रेम ने बचपन से ही अपने जीवन में दुखों को खेला हैं| वह हमेशा अपनी माँ को दुनिया की हर खुशी देना चाहते थे| आज प्रेम युवाओं के लुए भी प्रेरणास्त्रोत का काम कर रहे हैं| जो लोग एक बार प्रयास में असफल होने से ही हार मान लेते हैं उन्हें एक बार जरूर हमारे इस लेख को पढ़ना चाहिए|

छोटी उम्र में ही हो गया था पिता का देहांत

प्रेम कुमावत का परिवार पहले से ही आर्थिक तंगी से झूझ रहा था| जिस उम्र में एक बच्चा अपने जीवन की शुरुआत करता है उसी छोटी उम्र में प्रेम के पिता का देहांत हो गया| अब सारी ज़िम्मेदारी थी तो प्रेम के कंधों पर लेकिन अभी यह कंधे इतने मजबूत नहीं थे| जब प्रेम के पिता का देहांत हुआ तो वह पहली कक्षा में थे| अब प्रेम दिन में स्कूल जाते थे और स्कूल से आकर बकरियों को चराया करते थे|

दीये की रोशनी में करते थे पढ़ाई, साथ में करते थे नौकरी

12वीं कक्षा तक प्रेम ऐसे ही पढ़ते रहे| उसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए निजी कॉलेज में दाखिला लिया| साथ ही साथ उन्होंने नौकरी के लिए एक स्कूल में भी आवेदन किया और नौकरी हासिल की ताकि घर के हालात थोड़े बेहतर हो सके| लेकिन अभी भी प्रेम कुछ बड़ा करना चाहते थे, वह प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी कर रहे थे| घर में बिजली की सुविधा नहीं थी इसी कारण से प्रेम दीये की रोशनी में पढ़ाई करते थे|

24 बार हुए फ़ेल लेकिन नहीं मानी हार

प्रेम सरकारी अफसर बन कर अपने घर के हालातों को ठीक करना चाहते थे| इसके के लिए वह लगातार प्रतियोगी परीक्षाएँ दे रहे थे| लेकिन 24 बार उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा| लेकिन प्रेम ने तब भी हार नहीं मानी और वापस से एक बार फिर परीक्षा दी और पास भी हुए| अब प्रेम सरकारी अफसर बन चुके है| प्रेम ने हमेशा से सफलता के लिए तीन शब्दों को को अपने जीवन में उतारा है| अनुशासन, ईमानदारी और मेहनत इन तीनों को प्रेम ने अपना लक्ष्य बनाया और ज़िंदगी की उड़ान भरते गए|

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