Sunday, April 18, 2021
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भगत सिंह की एक बात ने बदल दी जिंदगी, 250 रूपये से शुरू हुए बिज़नस को पहुंचाया लाखों तक।

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सफलता के लिए अनेकों पड़ाव से गुजरना पड़ता है जैसे- कड़ी मेहनत, संघर्ष, बुलंद हौंसले और अनेकों बार असफलता का सामना करना। इन सभी पड़ाव को पार करने के पश्चात ही आपको सफलता मिल पाती है। लेकिन जो व्यक्ति असफलताओं का सामना डट कर ना कर पाए सफलता उससे कोसो दूर चली जाती है। आज हम आपको एक ऐसा ही सफर बताने जा रहे हैं जिसमें सफलता पर असफलता कुंडली मारे बैठी थी लेकिन इस व्यक्ति ने हार नहीं मानी और भगत सिंह की बात और अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर कुछ ऐसा कर दिखाया जो लाखों लोगों के लिए आज वरदान साबित हो रहा है। आइए जानते इस सफर के बारें में।
शौर्य का अनोखा सफर
दरअसल यह सफर है नोएडा के रहने वाले शौर्य गुप्ता का, जिन्होंने भगत सिंह की एक बात के ज़रिए अपने पूरे भविष्य को बदल डाला। शौर्य आज जॉबखबरी॰कॉम के डायरेक्टर हैं। शौर्य की कहानी बहुत ही दिलचस्प और दिल को छूने वाली है क्यूंकि शौर्य की कहानी में भगत सिंह ने बहुत ही अहम भूमिका निभाई है साथ ही शौर्य की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है जो असफलता को अपने सामने देख उससे डर कर भाग जाते हैं। शौर्य एक बहुत ही साधारण परिवार में जन्में थे, बचपन में ही स्वास्थ्य कारणों से उनके पिता का देहांत हो गया था। उनकी माँ ने ही उन्हें पढ़ाया-लिखाया। लेकिन उनका और उनकी माँ का कुछ बड़ा करने का सपना था। आज शौर्य ने अपनी माँ के इस सपने को अपनी कड़ी मेहनत से पूरा कर दिखाया है।

पहले स्टार्ट-अप में हुए फ़ेल, कॉलेज में भी नहीं मिला था दाखिला
सफलता ने शौर्य के जीवन में आने से पहले शौर्य के कड़े इम्तिहान लिए। एक बार उन्होंने अपना पहला स्टार्ट अप शुरू किया जिसको उन्होंने “बटन दबाओ- गाड़ी हटाओ” का नाम दिया। जिसके लिए उन्हें तारीफ़े तो मिली लेकिन पैसा नहीं मिला। जिसके बाद उनको अपना यह बिज़नस बंद करना पड़ा। साथ ही उन्हें किसी कॉलेज में भी दाखिला नहीं मिला।
तभी याद आई भगत सिंह की बात
कॉलेज में दाखिला न मिलने के कारण शौर्य टूट गए थे लेकिन तभी उन्होंने भगत सिंह की एक बात को याद किया “यह लड़ाई मेरी है, और मुझे ही लड़नी है” बस इसी वाक्य ने शौर्य के मनोबल को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। ज्यादा सोचने और कुछ बड़ा करने की सोच रखने के कारण शौर्य को कई नौकरियों से भी बाहर कर दिया गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

जानिए जॉबखबरी॰कॉम का सफर
जॉबखबरी॰कॉम का विचार शौर्य के मन में तब आया जब नौकरी के लिए उनसे पैसे मांगे गए थे, जो वह कतई नहीं देना चाहते थे। उसके बाद उनके मन में यह बात घर कर गई और उन्होंने दूसरों के साथ ऐसा न हो इसके लिए जॉबखबरी॰कॉम को बनाया। जिसमें उन्होंने सिर्फ 250 रूपये के पर्चे बाँट कर बिज़नस को शुरू किया था। अपनी कंपनी के यह पर्चे उन्होंने बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन आदि कई जगहों पर बाटें लेकिन उनके भाई को यह मंजूर नहीं था। शौर्य ने लगभग हार मान ही ली थी लेकिन तभी उन्हें भगत सिंह के वाक्य याद आ गए और उन्होंने नहीं रुकने का प्रयास किया।

शुरू होने के बाद 2 बार बंद हो गया था जॉबखबरी॰कॉम
शुरुआत में कंपनी से पैसा नहीं मिल पा रहा था जिसके कारण कंपनी बंद करनी पड़ी, दूसरी बार भी शौर्य को इसी परिस्थिति का सामना करना पड़ा तीसरी बार में शौर्य के कर्मचारी ने उनकी कंपनी के उसूलों को तोड़ा लेकिन इस बार शौर्य ने हार नहीं मानी और आज परिणाम आप के सामने हैं। शौर्य ने एक खास बातचीत में बताया था कि जिस कंपनी ने उन्हें नौकरी नहीं दी थी आज वही कंपनी उन्हें कांट्रैक्ट देती है। आज शौर्य लाखों में कमाते हैं और लोगों को नौकरी दिलाने में उनकी मदद करते हैं।

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