Saturday, November 27, 2021
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किसी भी परिस्थिति से निकलने के लिए आपके पास आत्मविश्वास होना बहुत जरूरी है| आत्मविश्वास ही एक ऐसी ताकत है जो बड़ी से बड़ी समस्या का निवारण कर सकती है| आज भी  कुछ लोगों का मानना है कि किसी भी बड़े कार्य या बिज़नस को करने के लिए शिक्षित होना अनिवार्य है, और जो सही भी है, क्यूंकि आज के समय में शिक्षित होना बहुत जरूरी है, लेकिन यदि आप किन्हीं कारणों से शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते, तो इसका मतलब यह नहीं आप कुछ बड़ा नहीं कर सकते| आज कहानी एक ऐसे ही शक्स कि जिन्होंने अशिक्षित होने के बाद भी अपनी मेहनत से अच्छे-अच्छों को पीछे छोड़ दिया है|

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आइए जानते है प्यारे खान का संघर्षपूर्ण सफर

प्यारे खान महाराष्ट्र के नागपुर शहर के एक छोटी सी बस्ती के रहने वाले हैं| प्यारे खान के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी| प्यारे खान का जीवन अनेकों कठिनाइयों से भरा हुआ था, कोई उनके साथ नहीं था, साथ था तो बस उनका आत्मविश्वास और उनका हौंसला| प्यारे खान हमेशा से ही कुछ बड़ा करने का सपना देखते थे लेकिन एक छोटी जगह से आने वाले व्यक्ति को हमारा समाज कुछ बड़ा करने के सपने देखने की इजाजत नहीं देता|

ऑटो चलाकर और गाड़ी धोकर चलाते थे घर का गुजारा

प्यारे खान की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह ऑटो चलाकर, गाड़ी धोकर और संतरे बेचकर अपना गुजारा चलाते थे| लेकिन इसमें भी उनके घर का गुजारा नहीं चल पता था, प्यारे कुछ बड़ा ही करना चाहते थे लेकिन उनके पास पैसो की कमी थी| उनका कोई भी रिश्तेदार उनको पैसे देने को तैयार नहीं था| जब प्यारे अपने एक रिश्तेदार से पैसे मांगने गए तो उस रिश्तेदार ने उनसे उनके घर के कागजात मांग लिए|

2004 में लिया पहला ट्रक वो भी हुआ दुर्घटनाग्रस्त, लेकिन नहीं मानी हार

2004 तक प्यारे ने अपना गुजारा ऐसे ही चलाया, साथ ही उन्होंने कई बैंकों में लोन के लिए भी आवेदन किया लेकिन किसी ने उन्हें लोन नहीं दिया| फिर एक बैंक ने उन्हें लोन दिया और उन्होंने अपनी जिंदगी का पहला ट्रक खरीदा, लेकिन प्यारे खान की किस्मत ने एक बार फिर प्यारे खान को धोखा दिया और उनका ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया| लेकिन प्यारे खान ने हार नहीं मानी और उन्होंने उस ट्रक को वापस ठीक किया और उसको वापस सड़कों पर उतारा| उन्होंने अपनी कंपनी को ashmi road carriers का नाम दिया|

टाटा स्टील, के॰एस इंटरनेशनल जैसी बड़ी कंपनियों के लिए भी कर चुके हैं काम

प्यारे ने एक बार भूटान में जाकर एक ऐसे विवाद को सुलझाया था जिसे बड़े से बड़े इंजीनियर नहीं सुलझा पा रहे थे| उसके बाद तो प्यारे को बड़े-बड़े ऑर्डर मिलने लगे| प्यारे की सर्विस लोगों को इतनी पसंद आई कि प्यारे को दुबई, बांग्लादेश से भी काम मिलने लगा| अब प्यारे खान को हज़ार नहीं, लाखों भी नहीं बल्कि करोडों के ऑर्डर मिलने लगे थे|

जेएसडबल्यू के लिए करते हैं काम और मिलते हैं 600 करोड़ तक के प्रोजेक्ट

एक साक्षात्कार में प्यारे ने बताया कि उन्होंने जेएसडबल्यू के साथ सिर्फ 5 लाख रूपये में काम करना शुरू किया था लेकिन जेएसडबल्यू को उनका काम इतना पसंद आया कि जेएसडबल्यू ने उन्हें बड़े बड़े प्रोजेक्ट देना शुरू कर दिया| जेएसडबल्यू ने एक बार उन्हें 600 करोड़ का प्रोजेक्ट भी दे डाला| क्यूंकि प्यारे खान की सर्विस बहुत ही अच्छी थी| प्यारे खान ने बताया कि जो बैंक कभी उन्हें 50 हज़ार तक का लोन नहीं देते थे अब वही बैंक उन्हें 150-200 करोड़ तक के लोन दे देते हैं|

प्यारे खान अपने हुनर के कारण जीत चुके हैं अनेकों पुरस्कार

अमूमन लोग कहते हैं कि डर के आगे जीत है, कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है और जिस काम को करने का मन न हो वह न करें, लेकिन प्यारे का मानना इन सबके बिल्कुल विपरीत है| उनका मानना है कि डर के आगे हमेशा दर्द होता है, कुछ पाने के लिए कुछ खोना नहीं कुछ करना पड़ता है और जिस काम को करने का मन न हो वह सबसे पहले करो| इन्हीं कुछ कथनों के आधार पर प्यारे खान आगे बढ़ते गए और अब उन्हें कई बड़े-बड़े पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है|

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