Thursday, May 13, 2021
- Advertisement -

35 रूपये से खड़ी की 13 करोड़ की कंपनी, कभी भोजन के लिए भी नहीं थे पैसे

Must Read

वैलंटाईन डे मनाने का अनोखा तरीका,मालगाड़ी के नीचे पहुंच गया प्रेमी जोड़ा, फोटो देखकर आएगा मजा

वैलंटाईन डे को प्यार के दिन के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में प्रेमी जोड़े...

अलग ही मिट्टी के बने तुषार, 17 साल तक असफलताओं से लड़े, अब बने जज

लोग दो या तीन साल की मेहनत के बाद सफल नहीं होते है तो वह टूट जाते है। लोग...

शहर घूमने सडक़ों पर निकला कोबरा तो रूक गया ट्रैफिक, घटना का वीडियो वायरल

वन्य जीवों के शहर में घूसने के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। कभी तेंदुआ तो कभी कोई...

गरीबी एक ऐसी दीमक है जो अच्छे-अच्छों के हौंसलों को खोखला कर देती है| लोग इस गरीबी से ही बचने के लिए मेहनत करते है और कोशिश करते हैं कि उनको कभी गरीबी का सामना न करना पड़े| लेकिन कई लोग ऐसे होते हैं जिनके जीवन में गरीबी का दुख भोगना लिखा ही होता है, लेकिन कहते हैं न कि संघर्ष आपके जीवन में आपको मजबूत बनाने के लिए आता है न कि कमजोर बनाने के लिए| बस कुछ ऐसा ही हुआ वीरल पटेल के साथ भी|

वीरल पटेल की सफलता का सफर

वीरल पटेल गुजरात के कच्छ में एक छोटे से गाँव में रहने वाले हैं| वीरल पटेल के पिता एक किसान हैं| वीरल पटेल ने बचपन से ही गरीबी को देखा है| लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी गरीबी को अपनी ताकत ही बनाया है| वीरल के पिता की खेती-बाड़ी में ज्यादा कमाई नहीं हो पाती थी, जिसके कारण घर का खर्च चलाना भी वीरल के पिता के लिए मुश्किल होता था| लेकिन वीरल उस गरीबी के सामने घुटने टेकने वालों में से नहीं थे|

गरीबी के कारण सातवीं कक्षा में ही छूट गई थी पढ़ाई, तब कुछ बड़ा करने की ठानी

वीरल पटेल की आर्थिक स्थिति बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी| वीरल ने गरीबी होने के कारण सातवीं कक्षा में ही पढ़ाई छोड़ दी थी| लेकिन अब वह शांत नहीं बैठ सकते थे क्यूंकि उनकी समस्याएँ धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही थी| तब उन्होंने गुजरात से मुंबई आने का फैसला किया और अपने सपने साकार करने की तरफ पहला कदम बढ़ाया| उनके पिता जी ने उन्हें कहीं से उधार लेकर 100 रूपये दिये, जिसमें से 65 रूपये ट्रेन खर्च में चले गए| अब उनके पास खाने के भी लाले पड़ गए थे|

भोजन के लिए करते थे फ्री में काम

वीरल जब मुंबई में आए तो उनके पास खाने के भी पैसे नहीं थे| तब उन्होंने एक स्टेशनरी की दुकान में काम करना शुरू किया, जिसमें उन्हें कोई पैसा नहीं मिलता था, मिलता था तो सिर्फ तीन वक़्त की रोटी| उसके बाद उनकी मेहनत को देखकर दुकानदार ने उन्हें 250 रूपये देना शुरू कर दिया|| उसके कुछ वक़्त बाद वीरल ने अपने एक दोस्त के साथ पार्टनर्शिप में एक स्टेशनरी की दुकान खोली| लेकिन वीरल कुछ बड़ा करना चाहते थे|

शुरू किया खुद का बिज़नस और बन गए 13 करोड़ की कंपनी के मालिक

सबसे पहले वीरल ने महाराष्ट्र के ठाणे में खुद की अपनी एक स्टेशनरी की दुकान शुरू की| जिससे वीरल को काफी अच्छा रिसपोनस मिल रहा था| लेकिन इसके बाद भी वीरल कुछ अच्छा और बड़ा करना चाहते थे| तभी उन्होंने अपने बेटे के नाम पर गौरव स्वीट्स की दुकान शुरू की| इसमें भी उन्हें खूब फायदा हुआ और आज इसी दुकान से वीरल 13 करोड़ रुपये कमा लेते हैं| आज गौरव स्वीट्स की अलग-अलग शाखाएँ शुरू हो चुकी हैं| आज वीरल की मेहनत रंग लाई और आज वह 13 करोड़ की कंपनी के मालिक बन चुके हैं|

बिलगेट्स के एक कथन ने बदल दी ज़िंदगी

बिलगेट्स ने कहा है कि “यदि आप गरीब पैदा हुए हैं तो आपकी गलती नहीं है, लेकिन यदि आप गरीब मर जाते हैं तो यह आपकी गलती है|” बस इसी कथन को वीरल ने अपने दिमाग में बैठा लिया था और सफलता पाने के लिए प्रयास करना शुरू कर दिया|

- Advertisement -

Latest News

वैलंटाईन डे मनाने का अनोखा तरीका,मालगाड़ी के नीचे पहुंच गया प्रेमी जोड़ा, फोटो देखकर आएगा मजा

वैलंटाईन डे को प्यार के दिन के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में प्रेमी जोड़े...
- Advertisement -

और भी पढ़े

- Advertisement -