Wednesday, May 12, 2021
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परीक्षा में 6 बार मिली असफलता भी नहीं तोड़ पाई हौंसले, एक बार फिर दी परीक्षा और बन गए PCS टॉपर

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किसी ने कहा है कि “असफलता एक चुनौती है इसे स्वीकार करो, क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो” आज के लेख में हम जिस शक्सियत की बात करने जा रहें है उनके लिए इससे बेहतर शायद ही कोई वाक्य हो| असफलता का तो हर किसी व्यक्ति को सामना करना पड़ता है, लेकिन आगे वही व्यक्ति जा पता है जो असफलताओं से कुछ सीखता है| आज हम आपको एक ऐसे ही शक्स के बारें में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अनेकों बार असफलताओं का सामना करा लेकिन कभी हार नहीं मानी और हमेशा असफलताओं से कुछ न कुछ सीखा|

बहुत ही हिम्मत वाले हैं अमित

हरियाणा में चरखी दादरी के रहने वाले अमित यादव की हिम्मत का तो क्या ही कहना| आमतौर पर लोग असफलताओं से इतना डर जाते हैं कि आगे बढ़ ही नहीं पाते| लेकिन अमित उन जैसे बिल्कुल नहीं थे| अमित ने कभी भी अपनी असफलताओं को अपनी कमजोर नहीं बनाया वह हमेशा उन्हें अपनी ताकत मानते थे, लेकिन जिंदगी ने भी उनका कड़ा इम्तिहान लिया जिसमें अमित यादव टॉपर बनकर पास हुए|

अपने घर के आस-पास स्ट्रीट लाइट नहीं जलने के कारण बदल गई जिंदगी

अमित यादव बचपन से ही पढ़ने-लिखने के शौकीन है| आज अमित एक डॉक्टर के साथ साथ एडुकेटर भी हैं| उनको पढ़ाने में भी बहुत रुचि थी| इसी के साथ वह अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी करते थे| लेकिन आमतौर पर उनकी कक्षाएँ रात में होती थी, एक बार वह रात में घर वापस आ रहे थे तो उन्होंने देखा कि उनके घर के आस-पास कोई स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही है| तब उनके पिता ने उन्हें बताया कि यह सब कलेक्टर के हाथ में होता है| तभी से उन्होंने ठान लिया कि वह अब ऐसा ही कुछ करेंगे ताकि कोई भी बच्चा ऐसी समस्या का सामना न करे|

पहले की डॉक्टरी और फिर करने लगे सिविल परीक्षा की तैयारी

एक बार उन्होंने अपने पिताजी से कहा कि वह सिविल परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं लेकिन उनके पिता ने कहा कि तुम पहले अपना कैरियर बना लो फिर चाहे कुछ भी करना| उसके बाद अमित ने चेन्नई के मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लिया और फिर वहाँ से डॉक्टरी पूरी की| उसके बाद उन्होंने वापस अपने सपने की तरफ रुख किया और सिविल सर्विस की तैयारी करनी शुरू कर दी|

डॉक्टरी की नौकरी में करते थे 24 घंटे काम, साथ ही करते थे पढ़ाई

डॉक्टरी करने के बाद अमित ने 2 बार upsc की परीक्षा दी लेकिन वह असफल रहे| उसके बाद उन्होंने भिवानी के सिविल अस्पताल में नौकरी करना शुरू कर दिया| अब वह 15 दिन अस्पताल में 24 घंटे काम करते थे बाकी बचे 15 दिन में वह अपनी परीक्षा की तैयारी करते थे| उसके बाद भी अमित ने चार बार और परीक्षा दी लेकिन वह असफल रहे| इसके बाद भी अमित ने हार नहीं मानी और मेहनत करते रहे|

एक कहानी ने बदल दी जिंदगी

इतनी असफलताओं के बाद भी अमित ने हिम्मत नहीं हारी और उन्होंने एक कहानी burning the boats को पढ़ा| तभी उन्होंने ठाना की वह दोबारा परीक्षा देंगे| उसके बाद उन्होंने हरियाणा PCS की परीक्षा पास की और टॉपर बन गए| आज अमित यादव खुद तो अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी कर ही रहे हैं साथ ही उन्होंने अपनी भी एक अकादमी शुरू की है जिसमें वह बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं|

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