Saturday, November 27, 2021
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एक किसान का बेटा बनाता है पशु आहार, हर महीने होती है 5 लाख की कमाई

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New Delhi:  आज की खबर उन युवाओं को समर्पित है जो आर्थिक तंगी की वजह से पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते, और उनका भविष्य अंधकार में चला जाता है। लेकिन जो छात्र यह सोचते हैं कि आर्थिक तंगी के कारण ही वह आगे नहीं बढ़ सके. उनके लिए आज हम एक ऐसी स्टोरी लेकर आए हैं, जिसके बाद संभावना है कि उनकी सोच बदलेगी। और वह अपने जीवन में कुछ अच्छा कर पाएंगे। विपिन दांगी जो मध्यप्रदेश के राजगढ़ के रहने वाले हैं और उनका जन्म एक किसान परिवार में हुआ। विपिन का परिवार भी आर्थित तंगी से जूझ रहा था, जिसकी वजह से वह पढ़ाई के दौरान ही इंदौर आकर एक प्राइवेट अस्पताल में पार्ट टाइम नौकरी करने लगे। हालांकि इस बीच उन्होंने पढ़ाई भी पूरी की है और फुट टाइम जॉब करने लगे। लेकिन सैलरी ज्यादा नहीं थी तो काम में मन नहीं लगा और विपिन ने दो साल पहले नौकरी छोड़ दी।

दूध बेचा, घाटा लगा तो बनाने लगे पशु आहार

dainik bhaskar

विपिन नौकरी छोडऩे के बाद अपने परिवार के पास लौटे और गांव में दूध बेचने का काम किया। परंतु दूध बेचने के दौरान उन्हें घाटा उठाना पड़ा। इसके बाद भी उन्होंने पशु आहार बनाकर बेचना शुरु किया। हालांकि शुरुआत में कमाई ज्यादा नहीं थी, लेकिन आज के वक्त में वह इस बिजनेस से महीने का पांच लाख रुपये कमा रहे हैं।
क्या कहते हैं विपिन
विपिन बताते हैं कि उन्होंने इंदौर से पढ़ाई की है। उन्होंने माइक्रोबायोलॉजी विषय में स्नातक किया है। वह बताते हैं कि दूध के कारोबार में घाटा हुआ तो लगभग छह माह तक मैं इंटरनेट के माध्यम से अलग-अलग काम करने की जानकारी लेने लगा। इस बीच मुझे ख्याल आया कि क्यों न मैं किसानों के पशु आहार बनाऊ। क्योंकि किसानों को पौष्टिक आहार कोई उपलब्ध नहीं करा पा रहा था। वह बताते हैं कि बीते साल ही उन्होंने पशु आहार बनाना शुरु किया है। विपिन बताते हैं कि उनके पास 3 हजार से ज्यादा कस्टमर है। और वह 17 हजार की लागत से 2 से 3 टन पशु आहार तैयार करते हैं, एक टन की कीमत 17 हजार रुपये है, जिसे वह किसानों को 18 हजार रुपये में बेचते हैं।

ऐसे तैयार कर रहे हैं पशु आहार
विपिन बताते हैं कि पशु आहार बनाने के लिए वह कपास, मूंगफली, सोयाबीन, सरसो की खली, मक्का, जौं, गेंहू सहित अन्य अनाजों को मिलाकर तैयार करते हैं। वह बताते हैं जब आहार का पूरा प्रोसेसिंग हो जाती है तो उसकी पैकिंग कर किसानों तक पहुंचाया जाता है।

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