Tuesday, May 18, 2021
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रिटायरमेंट के बाद ये दं​पत्ति उगा रहे हैं 20 किस्म के कटहल, हर सप्ताह कमाते हैं 45 हजार रुपये

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लंबे समय से नौकरी कर रहे लोग अपने रिटारमेंट का इंतजार बेसब्री से करते रहते हैं. कुछ लोग रिटायरमेंट के बाद आराम करना पसंद करते हैं तो वहीं कुछ बुजुर्ग अपने शौक पूरा करना चाहते हैं. रिटायरमेंट के दौरान आधी उम्र बचती है, ऐसे में लोग अपने पुराने शौक को पूरा करने में बिताते हैं. आज की कहानी है, ऐसे बुजुर्ग की जो रिटायरमेंट के बाद गार्डनिंग का शौक पूरा कर रहे हैं.

नौकरी के दौरान खरीदा था 7 एकड़ जमीन

पी. थंकामणि और ए. नारायणन अपने घर के पास खेतों में सब्जियां और फल उगा रहे हैं. केरल की रहने वाली थंकामणि बतौर प्रिंसपिल 2005 में रिटायर हुई थीं वहीं उनके पति 2000 में कंडेक्टर के पद से रिटायर हुए थे. इस दंपत्ति ने नौकरी के दौरान ही किसान बनने का मन ​बना लिया था इसलिए इन्होंने साढ़े सात एकड़ ज़मीन खरीद ली थी. रिटायरमेंट के बाद पति-पत्नी दोनों खेती करने लगे.

खेत से घर दूर होने से होती थी परेशानियां

नौकरी के दौरान भी मैं सब्जी उगाने के लिए टाइम निकाल लेता था. अपने खेत में अपने द्वारा उगाई हुई सब्जियां खाने का आनंद ही अलग है. खेत से हमारा घर बेहद दूर था, इसलिए हमने खेत के अंदर ही अपना घर बना लिया. इस जगह रहकर हमें बेहद खुशी मिलती है. हमने अपने खेत का नाम ‘प्रकृति क्षेत्रम’ रख दिया है.  फसलों की सुरक्षा के लिए हमने खेत में सीसीटीवी कैमरा भी लगाया है. इस कैमरे के जरिए हम देख सकते हैं कि हमारी फसल को कौन बर्बाद कर रहा है.

सब्जियां बेचकर होती है 20 से 45 हज़ार की कमाई

ये दंपत्तियां अपने खेत में उगाई हुई सब्जियों को बाज़ार में बेचने के लिए भी देती हैं. नारायण हर सप्ताह स​ब्जी बेचकर 20 से 45 हज़ार रुपये तक कमा लेते हैं. उनका कहना है कि ये पैसे बीज और पौधे लेने में ही खर्च हो जाते हैं. अपने खेत की रखवाली हम खुद ही करते हैं. पैसे की हमारे पास कोई कमी नहीं है. हमने आराम करने के लिए खेती को चुना है. सरकारी कर्मचारी होने की वजह से हमें अच्छी पेंशन मिल रही है.

The beeter india

खेत में हैं 30 किस्म के केले के पेड़

नारायण के ‘प्रकृति क्षेत्रम’ में वियतनाम एर्ली, चेम्भारती, सुगंध वरिक्का, और रोज वरिक्का जैसे कटहल के 20 किस्म के पेड़ हैं. उन्होंने केले के भी 30 किस्म के पेड़ लगाए हैं. केले और कटहल के अलावा इनके खेत में मैंगोस्टीन, आम, रोज-एपिल, ड्रैगन फ्रूट, अमरुद के पेड़ भी लगे हुए है. फार्म में टमाटर और बीन्स की भी कई किस्में हैं. उनके दोस्त उन्हेें तरह-तरह के पेड़-पौधे लाकर देते रहते हैं, दोस्तों का कहना है कि वह पेड़ों की बहुत से अच्छे से देखभाल करते हैं. करेला की एक ऐसी प्रजाति इनके पास है, जो खाने में बिल्कुल कड़वा नहीं होता है. इसकी डिमांड भी बाज़ार में बहुत ज्यादा है.

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इनकी दोनों बेटियां विदेश में नौकरी करती हैं. लेकिन जब वह केरला आती हैं तो माता-पिता का खेती में हाथ बंटाती है. माता-पिता की तरह इनकी बेटियों को भी यहां का वातवरण काफी अच्छा लगता है.

रिटायरमेंट के बाद आराम करने के बजाय खेती करके लोगों तक शुद्ध सब्जियां और फल पहुंचाने वाले इस दं​पत्ति को हम सलाम करते हैं. अन्य बुजुर्ग लोग भी इनसे प्रेरणा ले सकते हैं.

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