Tuesday, May 11, 2021
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ढाई साल के बच्चे को दूर करके अनुपमा ने की तैयारी, पहले प्रयास में पास की UPSC की परीक्षा

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हर लड़की का सपना होता है कि वह समाज में अपनी पहचान बनाएं. उसे अपने पिता और पति के नाम से पूरी ज़िंदगी भर ना पहचाना जाए. शादी के बाद लड़कियों की ज़िंदगी में काफी बदलाव आ जाता है, उनके सपनों पर जैसे ब्रेक लग जाता है. लेकिन कुछ लड़कियां ऐसी भी हैं जो शादी और बच्चे के बाद भी अपने सपनों को मरने नहीं देती है. सपनों को पूरा करने के लिए दिन—रात एक कर देती है. आत्मविश्वास से लेबरेज ये लड़कियां दूसरों के लिए मिसाल पेश करती हैं.

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जिन लड़कियों का कहना होता है कि बच्चे होने के बाद महिला की अपनी ज़िंदगी खत्म हो जाती है, उन्हें अनुपमा सिंह की कहानी पढ़नी चाहिए. पटना की रहने वाली अनुपमा ने यूपीएसी की तैयारी के लिए अपने ढ़ाई वर्ष के जिगर के टुकड़े को परिवार के पास छोड़ दिया. एक मां के लिए अपने बच्चे से दूर रहने का दर्द क्या होता है, वह एक मां ही समझ सकती है. तैयारी के लिए अनुपमा ने दिल्ली के एक कोचिंग में एडमिशन ले लिया. मेहनत के दम पर अनुपमा ने पहले ही प्रयास में 90वां रैंक हासिल कर लिया. अनुपमा ने दिखाया दिया है कि अगर आप में कुछ अलग करने का जूनुन हो तो कोई भी समस्या रास्ते में पत्थर बन कर खड़ी नहीं रह सकती है.

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बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली अनुपमा बचपन से ही पढ़ाई—लिखाई में काफी होशियार थीं. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की बेटी अनुपमा ने बीएचयू यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ़ सर्जरी की डिग्री हासिल की है. डिग्री पूरी होने के बाद सरकारी अस्पताल में उनकी नौकरी भी लग गई थी. नौकरी के दौरान उन्होंने देखा कि स्वास्थ्य विभाग में कई ऐसी कमियां हैं, जिसे में डॉक्टर रहकर खत्म नहीं कर सकती हूं. यहीं से उनका मन यूपीएसी की तैयारी करने में लगा.

बच्चे के लिए पूरे-पूरे दिन रोती थी

अनुपमा बताती हैं कि एक बच्चे के मां होने के बाद आपके उपर बहुत सारी जिम्मेदारियां आ जाती हैं. बच्चे के साथ पढ़ना बेहद मुश्किल काम है. पढ़ाई करने के लिए मैं अपनी बच्ची को छोड़कर दिल्ली आ गई थीं. लेकिन बच्ची के बिना मेरा यहां बिल्कुल मन नहीं लग रहा था. कई बार तो मैंने पढ़ाई बीच में ही छोड़ने का मन बना लिया था. दिल्ली में मैं अपनी बच्ची के लिए कई दिनों तक रोती रहती थी. लेकिन मेरे ​पति और ननद मुझे समझाते कि तुम अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए मेहनत से पढ़ाई करो.

सेल्फी स्टडी के बिना सफलता संभव नहीं है

सांइस की स्टुडेंट होने के नाते मुझे आर्टस विषय को समझना बहुत कठिन लगता था. कोचिंग सेंटर में पढ़ाने वाले टीचर केवल आपका मार्गदर्शन कर सकते हैं. सेल्फी स्टडी से ही आपको इस परीक्षा में सफलता मिलती है. अगर आप इस परीक्षा की तैयार कर रहे हैं तो अपना 100 प्रतिशत इस परीक्षा को दे दो.

दिन में एक बार बच्चे से करती थी वीडियो कॉल

इस परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को अपने आपको मोटिवेट रखना पड़ता है. अनुपमा अपने आपको मोटिवेट रखने के लिए नियम बनाती थीं. उनके नियमों में होता था जैसे कि आज इतना सिलेबस खत्म करके ही बेटे से वीडियो कॉल पर बात करूंगी. अपनी तैयारी के दौरान वह 2 महीने में अपने घर जाती थीं. उन्होंने अपने उपर विश्वास था कि वह एक ही प्रयास में सफलता हासिल कर लेंगी. उनका विश्वास 2019 के रिजल्ट के दौरान देखने को भी मिला.

वह सभी से कहती हैं कि अपने सपनों को बंद आंखों से नहीं बल्कि खुले आंखों से देखो और उसे पूरा करो. अगर आप सपने देख सकते हो तो उसे पूरा करने की भी हिम्मत लाओ.

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