Thursday, April 22, 2021
- Advertisement -

नमकीन फैक्ट्री में 50 रुपये कमाने वाले बालबांका बनें सेना में ​लेफ्टिनेंट

Must Read

वैलंटाईन डे मनाने का अनोखा तरीका,मालगाड़ी के नीचे पहुंच गया प्रेमी जोड़ा, फोटो देखकर आएगा मजा

वैलंटाईन डे को प्यार के दिन के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में प्रेमी जोड़े...

अलग ही मिट्टी के बने तुषार, 17 साल तक असफलताओं से लड़े, अब बने जज

लोग दो या तीन साल की मेहनत के बाद सफल नहीं होते है तो वह टूट जाते है। लोग...

शहर घूमने सडक़ों पर निकला कोबरा तो रूक गया ट्रैफिक, घटना का वीडियो वायरल

वन्य जीवों के शहर में घूसने के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। कभी तेंदुआ तो कभी कोई...

बिहार के रहने वाले 28 वर्षीय बालबांका तिवारी ने साबित कर दिया है कि संघर्ष करने वालों को एक दिन सफलता जरूरी मिलती है. बालबांका सैन्य अकादमी पासिंग आउट परेड पास करके आर्मी में लेफ्टिनेंट बन गए हैं. भोजपुर के संदुरपुर बरजा गांव के रहने वाले तिवारी के परिवार उनकी सफलता से बेहद खुश हैं. आर्मी में लेफ्टिनेंट बनने से पहले तिवारी एक स्नैक्स फैक्ट्री में काम करते थे, जहां उनकी सैलरी महज 50 रुपये थी.

10 वीं कक्षा में शुरू कर दिया था कमाना

किसान पिता के बेटे बालबांका परिवार की आर्थिक सहायता करने के लिए हाई स्कूल की पढ़ाई के बाद स्नैक्स फैक्ट्री में काम करने लगे थे. बेहद गरीब परिवार से संबंध रखने वाले बालबांका बताते हैं कि परिवार की सहायता करने के लिए नौकरी करने के अलावा  मेरे पास कोई विकल्प नहीं था. 10 वीं परीक्षा पास करने के बाद मैं नौकरी खोजने के लिए ओडिशा चला गया, वहां मुझे लोहे की फिटिंग की फैक्ट्री में काम मिला. कुछ दिन वहां नौकरी करने के बाद मैंने स्नैकस फैक्ट्री में काम करने लगा. 12 वीं की पढ़ाई के साथ-साथ मैं काम भी ग्रेजुएशन में एडमिशन लेने के बाद, उनके एक चाचा ने उन्हें सेना में बतौर सिपाही शामिल होने का सुझाव दिया था. चाचा के सुझाव पर उन्होंने बतौर सिपाही ज्वाइनिंग कर ली थी. साल 2012 तक वह सेना के इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर्स केंद्र में तैनात थे.करने लगा था. बालंबाका ने अपनी पढ़ाई का खर्चा ट्यूशन पढ़ा कर उठाया था.

संघर्ष का दूसरा नाम है बालबांका

एक सिपाही के रूप में सेवा करने के दौरान मैंने वहां पर एससी कैडेट के बारे में सीखा. एससी कैडट सिपाहियों को कमीशन अधिकारी बनने की अनुमति देता है. इसके बाद बालबांका ने 2017 में एसीसी परीक्षा को पास किया और 2020 में लेफ्टिनेंट बन गए. संघर्षों के कई सोपानों को पार करके बालबांका को ये सफलता हाथ लगी है. अकसर आपके बड़ों ने आपसे कहा होगा कि संघर्ष करने वालों को एक दिन जरूर सफलता मिलती है.

- Advertisement -

Latest News

वैलंटाईन डे मनाने का अनोखा तरीका,मालगाड़ी के नीचे पहुंच गया प्रेमी जोड़ा, फोटो देखकर आएगा मजा

वैलंटाईन डे को प्यार के दिन के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में प्रेमी जोड़े...
- Advertisement -

और भी पढ़े

- Advertisement -