Friday, April 23, 2021
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दिव्यांग होना अभिशाप नहीं, यमुना को देखो एक हाथ से दिव्यांग था, जीत लिए इतने गोल्ड मेडल

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New Delhi: अकसर इंसान का कोई अंग अगर खराब हो जात है तो वह अपने जीवन को ऐसे जीता है जैसे मानों उसे अब जीने का कोई हक नहीं है। लेकिन उन लोगों को यमुना के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए, जो दिव्यांग होने के बावजूद भी ऐसे कीर्तिमान लिख चुखा है, जो अच्छे अच्छे खिलाड़ी भी नहीं कर पाए। जी हां आज बात कर रहे हैं यमुना कुमार पासवान की। जो एक हाथ से दिव्यांग हैं, लेकिन खेलने के जज्बे ने उन्हें नई पहचान दिला दी है। यमुना ने ताइक्वांडो में बड़े-बड़े खिलाडिय़ों को चित कर अपने नाम अब तक 50 गोल्ड, 3 सिल्वर और 4 ब्रॉंज मेडल जीते हैं। हालांकि यमुना का सफर यहां तक इतना आसान भी नहीं था। चलिए जानते हैं यमुना के बारे में

अस्पताल में रहने के बाद सोच लिया खिलाड़ी बनना है
यमुना बताते हैं कि साल 2003 में एक सडक़ दुर्घटना में उन्होंने अपना एक हाथ खो दिया। जिस दौरान दुर्घटना हुई, उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया। करीब दो से तीन माह अस्पताल में रहने के बाद उन्होंने सोच लिया कि ताइक्वांडो खिलाड़ी बनना है। बस क्या इसके लिए कड़ी मेहनत करने लगे, और साल 2004 में पहली बार इस खेल में गोल्ड मेडल जीत लिया। इसके बाद उन्होंने कई टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीत लिए। बताते चले कि यमुना ने जिला, राज्य व इंटरनेशनल प्रतियोगिता में लगभग 57 से ज्यादा मेडल अपने नाम किए हैं

राज्यपाल ने भी किया है सम्मानित
यमुना के शानदार प्रदर्शन के मुरीद झारखंड के राज्यपाल भी हैं। राज्यपाल द्रौपदी मुर्मु ने दिव्यांग खिलाड़ी यमुना को साल 2019 में सम्मानित भी किया है। इसके अलावा उन्हें कई राज्य के कई नामी-जानी हस्तियों से सम्मान प्राप्त है।

यमुना ने खिलाडिय़ों के लिए कर दी यह मांग
दिव्यांग खिलाड़ी यमुना ने कहा कि खेल कोटे से ताइक्वांडो खिलाडिय़ों को सरकारी नौकरी दी जाए। जिससे उन्हें भी सरकारी मदद मिल सके। यमुना कहते हैं कि अन्य खेल की तुलना में तो सरकार सरकारी नौकरी खिलाडिय़ों को देती है। इसलिए हमने यह मांग की है। क्योंकि हम लोग कड़ी मेहनत कर राज्य व देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में हमे नौकरी मिलती है तो हमे सहारा मिलेगा।

source dainik jaghran

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