Wednesday, May 12, 2021
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हादसे में गवाए दोनों पैर, लेकिन नहीं बने किसी पर बोझ और शुरू की खुद की कंपनी

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किसी ने सही कहा है यदि आप कुछ करने की ठान लो तो फिर कोई भी समस्या आपको रोक नहीं पाएगी| कई लोग अपनी समस्याओं को अपनी कमजोरी का रूप दे देते है लेकिन कुछ लोग इन्हीं समस्याओं को सफलता का रास्ता समझ लेते है| आज कहानी एक ऐसे शक्स की जिसने अपनी शारीरिक समस्या को कभी अपनी सफलता के आड़े नहीं आने दिया और खुद की कंपनी शुरू कर बन गए कई लोगों के मसीहा|

बहुत ही धैर्यशील व्यक्ति हैं अर्शीद अहमद वानी

जम्मू और कश्मीर के पुलवामा में रहने वाले अर्शीद अहमद वानी बहुत ही धैर्यशील व्यक्ति हैं| अर्शीद को एक हादसे में अपने दोनों पैर गवाने पड़ गए थे| इस हादसे से तो अच्छा खासा व्यक्ति भी अपनी हिम्मत छोड़ देता है| लेकिन उन्होंने कभी खुद को कमजोर नहीं होने दिया| आमतौर पर कुछ लोगों का मानना होता है कि एक दिव्यांग व्यक्ति सिर्फ परिवार पर बोझ की तरह होता है लेकिन अर्शीद ने यह साबित कर दिया कि एक दिव्यांग व्यक्ति भी चाहे तो कुछ भी कर सकता है|

काम करते वक़्त हुआ हादसा

हादसे से पहले वानी एक कारपेंटर थे| वह जगह-जगह जाकर काम किया करते थे| लेकिन 2016 ने उनके जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख दिया और जिंदगी को एक नई दिशा दे दी| तब वानी एक गौशाला की छत पर काम कर रहे थे लेकिन तभी उनका संतुलन बिगड़ गया और वह छट से नीचे बोल्डर पर गिर पड़े| जिसके बाद वानी की जान तो बच गई लेकिन उनके दोनों पैर लकवाग्रस्त हो गए| लेकिन तब भी वानी ने हार नहीं मानी|

शुरू किया खुद का बिज़नस

बेशक वानी अपने दोनों पैर खो चुके थे लेकिन उनके कुछ कर दिखाने का जज़्बा अभी भी उनके पास ही था| उसके बाद वानी ने अपनी एक लकड़ी की कंपनी शुरू की| उन्होंने एक वुडवर्क यूनिट को शुरू किया| शुरुआत में तो वह अपने रिशतेदारों से पैसे लेकर उस यूनिट को चला रहे थे लेकिन उसके बाद वह ज्यादा किसी पर बोझ नहीं बनना चाहते थे साथ ही उनके सामने आर्थिक समस्याएँ भी बहुत थी| इसलिए उन्होंने ऋण लेने के लिए जगह-जगह आवेदन किए|  उसके बाद उन्हें अपने काम के लिए जिला उद्योग केंद्र से ऋण मिला और उन्होंने अपने काम को शुरू किया| आज वानी के साथ कई लोग उनकी यूनिट में काम कर रहे हैं| आज वानी दिव्यांग होते हुए भी किसी पर बोझ नहीं हैं अपितु दूसरों को नौकरी देकर उनका सहारा बन चुके है|

पुलवामा के डिप्टी कमिश्नर ने दिया साथ

वानी को ऋण दिलाने में पुलवामा के डिप्टी कमिश्नर ने उनकी मदद की और उनके इस विचार को सराहा| आज वानी को जिला प्रशसन की और से 1000 रूपये प्रतिमाह पेंशन भी दी जाती है| आज वानी अनेकों दिव्यांग लोगों के प्रेरणास्त्रोत बन चुके हैं|

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