Tuesday, April 20, 2021
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दोनों पैर लकवाग्रस्त थे, फिर भी हौसले थे बुलंद, शख्स ने व्हीलचेयर पर बैठ कर शुरु किया अपना कारोबार, छह लोगों को भी दी नौकरी

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New Delhi: हिम्मत, हौसला और जुनून हो तो व्यक्ति क्या नहीं कर सकता है। बस काम करने की सच्ची नियत होनी चाहिए. फिर देखिए काम भी होगा और साथ में आपकी पहचान भी बनेगी। आज की कहानी एक ऐसे शख्स की लेकर आए हैं, जिन्होंने कभी अपनी दिव्यांगता को अपने हुनर के बीच नहीं आने दिया, कभी दोनों पैर से मजबूत अर्शीद अहमद वानी कारपेंटर का काम कर घर का गुजारा चलाते थे। लेकिन अचानक हुए एक हादसे में उनके पैर पर गंभीर चोटें आई। डॉक्टरों ने ईलाज के दौरान बताया कि वानी के पैर लकवाग्रस्त हो चुके हैं। इसका मतलब यह हुआ कि अब वानी कभी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सकते हैं। इस खबर को पाकर वानी काफी दुखी हुए। क्योंकि उन्हें कहीं काम नहीं मिल रहा था, जिससे वह अपना गुजारा चला सकते थे। लेकिन वानी ने ठान लिया था कि वह कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएंगे। उन्होंने जिला प्रशासन की मदद से अपना कारोबार शुरु कर दिया है, जिसमें वह लकड़ी के गेट व खिडक़ी बना रहे हैं, मजे की बात यह है कि उनके काम को लोग सराहा रहे हैं, साथ ही कई ऑर्डर भी दे रहे हैं।

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छह लोगों को रोजगार
अर्शीद अहमद वानी(34) जिला पुलवामा के लिटर गांव के रहे वाले हैं वह बताते हैं कि वह पेशे से एक कारपेंटर थे, लेकिन बीते दो साल पहले एक घटना हुई, जिसके बाद उनका पूरा जीवन ही बदल गया। पहले तो दोनों पैर किसी काम के नहीं रहे। वहीं लगभग दो साल तक अपने जीवन पर निराश होता रहा। वानी बताते हैं कि जब वह दो साल तक व्हील चेयर पर थे तो उन्हें कई बार ख्याल आया कि क्यों न अपना कारोबार शुरु किया जाए। इस सोच को वानी ने कुछ लोगों के साथ शेयर किया। जब लोगों ने उसका साथ दिया तो उसने अपना लकड़ी का कारोबार शुरु कर दिया।

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पैसे की तंगी के बीच जिला प्रशासन ने की मदद
वानी बताते हैं कि लकड़ी के द्वारा बनाए गए सामानों के लिए पैसे की जरूरत थी। लेकिन आर्थिक स्थिति मेरी ठीक नहीं थी।फिर मुझे किसी ने बताया कि जिला प्रशासन से मदद मांगने पर आर्थिक सहायता मिल सकती है। मैंने एक पत्र जिला प्रशासन को लिखा, और डिप्टी कमीशनर की ओर से मेरी मदद की गई। मुझे लकड़ी का बिजनेस खोलने के लिए ऋण मिल गया। वह बताते हैं कि उनके लकड़ी के कारोबार में उनके साथ छह लोग ओर काम करते हैं, आप आसान भाषा में कह सकते हैं कि इस दिव्यांग व्यक्ति ने खुद को जिंदा नहीं किया बल्कि छह लोगों को रोजगार देकर उन्हें भी अपने पैर पर खड़ा किया है। वानी खुद बताते हैं कि जिला प्रशासन की मदद से उन्हें महीने का पेंशन भी मिल रहा है।

भीख नहीं मांगना चाहिए
वानी ने उन लोगों से अपील की है कि जो किसी कारण दिव्यांग हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भले ही जीवन में कैसे भी समय आए। लेकिन कभी किसी के सामने हाथ फैलाकर भीख नहीं मांगनी चाहिए। हिम्मत, हौसला रखना चाहिए क्या पता भगवान ने आपके लिए कुछ बेहतर सोच रखा हो।

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