Tuesday, May 11, 2021
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डॉक्टर ने दी ऑनलाइन चिकित्सक सलाह, जिससे बच गई एक नवजात की जान

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New Delhi: पृथ्वी पर अगर किसी को भगवान का दर्जा मिला है तो वह हैं हमारे डॉक्टर। जो 24 घंटे हमारी जान बचाने के लिए तत्पर रहते हैं। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि कोविड के दौरान डॉक्टर अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों का ध्यान रख रहे हैं, और अभी भी उनका मिशन जारी है। बहरहाल, आज बात हम ऐसे डॉक्टरों की करने वाले हैं, जिनकी वजह से एक नवजात की जान बची है। दरअसल, उत्तराखंड के बेतालघाट गांव में रहने वाली कमला देवी ने कम्प्यूटर वाले डॉक्टर साहब को धन्यवाद कर रही है। क्योंकि अगर सही समय पर कम्प्यूटर वाले बाबा ने उचित चिकित्सक परामर्श नहीं दिया होता तो कमला देवी के घर जन्मी नवजात की जान बचा पाना मुश्किल हो जाता।
बताते चले कि उत्तराखंड सरकार ने एक मुहिम शुरु की है, जिसके तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को ऑनलाइन मोड में डॉक्टर उचित चिकित्सक सलाह देते हैं। इस सेवा की शुरुआत अप्रैल माह में की गई थी। गौर करने वाली बात यह है कि ई-संजीवनी ओपीडी के तहत लोगों को घर बैठे मुफ्त में सेवा दी जा रही है। इस सेवा का इस्तेमाल यहां की सरकार ने कोविड के दौरान भी किया। इस सेवा के माध्यम से मरीज सीधे डॉक्टर से अपनी समस्या बता सकते हैं, और डॉक्टर उन्हें ऑनलाइन मोड में चिकित्सक सलाह देते हैं।

इस सेवा के बारे में क्या कहते हैं मरीज
47 साल के संजय बिष्ट बताते हैं कि वह अल्मोड़ा के रहने वाले हैं, वह एक वायरस की चपेट में थे। इस वायरस को लेकर में काफी डर गया था। क्योंकि एक तरफ लॉकडाउन था , जिसकी वजह से में कहीं भी नहीं जा सकता था। इस दौरान मैंने भी वीडियो कॉल के माध्यम से डॉक्टरों से बात की उन्होंने मुझे कुछ दवाईयां लेने की सलाह दी और होम आइसोलेट होने का निर्देश दिया। जिसके बाद में ठीक हुआ।

इस सेवा के शुरु होने के बाद क्या कहा सीएम ने
उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा था कि ई-संजीवनी के लॉन्च होने के बाद मिलने वाली सेवा हेल्थ सेक्टर में एक गेम चेंजर के रुप में काम करेगी। उन्होंने बताया कि 700 सरकारी चिकित्सा सुविधाओं व संस्थानों को टेलीमेडिसीन योजना के तहत लाया गया है। जिससे 29 हजार से अधिक लोगों को लाभ मिला है। यह वह लोग हैं जो पहाड़ी इलाकों में रहते हैं। बताते चले कि इस सेवा की शुरुआत पहले तीन जिलों जैसे नैनीताल, देहरादून और अल्मोड़ा में किया गया था। अब उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में सेवा दी जा रही है।

यह सेवा ऐसा करती है काम
जानकारी के मुताबिक ई-संजीवनीओपीडी पर पहले लॉग इन करना पड़ता है। जिसमें मरीज को अपना पूरा पता भरना होता है। जिसके बाद मरीज को डॉक्टर से मिलने के लिए अपॉइंटमेंट मिली थी। जिसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डॉक्टर के द्वारा मरीज को चिकित्सक सलाह दी जाती है। सुबह 9 बजे से लेकर शाम छह बजे तक सेवा दी जाती है। उत्तराखंड की राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की प्रबंध निदेशक सोनिका बताती हैं कि इस योजना का उद्देश्य यह है कि जिन तक स्वास्थ्य सेवा नहीं पहुंच पाती है, उन तक इस योजना के तहत पहुंचाया जाए

source the new indian express

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