Saturday, November 27, 2021
- Advertisement -

अंग्रेज़ी न आने के कारण नहीं मिला था कॉलेज में दाखिला, आज IPS के साथ-साथ बन चुके हैं उत्तरप्रदेश के “सुपर कॉप”

Must Read

देश की पहली एमबीए पास सरपंच है छवि, अपनी मेहनत से बदल दी गांव की सूरत

नई दिल्ली : हमने किताबो, किस्से कहानियों में ऐसी चीजे जरूर पढ़ी होगी जिसमे युवा ने कॉरपोरेट नौकरी (corporate...

आपकी लाइफ बदल देगा मिट्टी का ये ए. सी. , बिना बिजली और बिना खर्च के देता है ठंडक

नई दिल्ली : जिस तरह से गर्मी बढ़ती जा रही जा रही है एयर कंडीशनर का प्रयोग भी बढ़ता...

अंग्रेजी हुकूमत को चारों खाने चित्त कर दिया था बोरोलीन ने, आज भी बाजार में है इस क्रीम का दबदबा

बोरोलीन बाज़ार में एक जानी मानी एंटीसेप्टिक क्रीम की ब्रांड है। आज इतने वर्षों बाद भी बोरोलीन का बाज़ार...

सफलता, जिसके पीछे हर कोई भागता है, हर कोई सफलता को हासिल करना चाहता है| लेकिन कुछ लोग सफलता को पाने के लिए अपना जी-जान एक कर देते हैं| कहते है न कि सफलता 1 दिन में नहीं मिलती है, लेकिन ठान लो तो 1 दिन जरूर मिलती है|” आज हमारे देश के सुपर कॉप इसी वाक्य का जीता-जागता उदाहरण बन चुके हैं| असल में सफलता के पीछे भागना ही नहीं चाहिए क्यूंकि यदि आपके पास किसी कार्य को करने का जोश है और आपके हौंसले बुलंद हैं तो कामयाबी आपके पीछे भागकर आएगी|

आज हम बात कर रहे हैं उत्तरप्रदेश के सुपर कॉप नवनीत सिकेरा के बारें में| नवनीत सिकेरा को एंकाउंटर स्पेशलिस्ट भी कहा जाता है| नवनीत उत्तरप्रदेश के एटा जिले के रहने वाले हैं और आज वह लखनऊ में IG के पद पर नियुक्त हैं| नवनीत एक छोटे से गाँव में रहते थे और उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी| लेकिन नवनीत पढ़ना चाहते थे और अपनी ज़िंदगी में कुछ अच्छा करना चाहते थे| लेकिन एक गरीब बच्चा जिसको अंग्रेज़ी भी नहीं आती थी, उसके लिए इस “अंग्रेज़ी प्रभावित समाज” में रहना और आगे बढ़ना बिल्कुल भी आसान नहीं था| लेकिन नवनीत ने हिम्मत नहीं हारी और नकारात्मकता को छोड़ अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित किया|

अंग्रेज़ी न आने के कारण नहीं मिला था कॉलेज में दाखिला

नवनीत की आरंभिक शिक्षा अपने गाँव के स्कूल से हुई थी| उसके बाद उन्होंने बीएससी करने का सोचा| लेकिन एक छोटे गाँव व गरीब परिवार से होने और अंग्रेज़ी न आने के बावजूद नवनीत सोच भी कैसे सकते थे कि उनको आसानी से कहीं दाखिला मिल जाएगा| वही हुआ जब नवनीत बीएससी के लिए दिल्ली आए और हंसराज कॉलेज में जाकर दाखिले का फॉर्म मांगा तो उन्हें वह फॉर्म तक भी नहीं दिया गया और उस व्यक्ति ने नवनीत के हाथ में कुछ पैसे रख दिये और कहा कि वापस गाँव चले जाओ, समय बर्बाद न करो| उसके बाद नवनीत को एहसास हुआ कि इस समाज में उन्हें इतनी आसानी से कुछ नहीं मिलने वाला| तब नवनीत ने जीतोड़ मेहनत की और उन्होंने IIT और GMAT जैसी परीक्षाओं को पास किया| जिसके बाद उन्हें IIT रुड़की में दाखिला मिला| उसके बाद M॰tech के लिए उन्होंने IIT दिल्ली में दाखिला लिया|

पहले ही प्रयास में निकाली UPSC की परीक्षा

एक बार नवनीत के पिता जी को किसी तरह की असुविधा हुई तो उन्होंने पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज़ करानी चाही लेकिन पुलिस ने शिकायत लिखने के बजाए उनके पिता जी से अभद्र व्यवहार किया जो नवनीत से कतई बर्दाश्त नहीं हुआ| उसी के बाद नवनीत M.tech छोड़ सिविल सर्विस की तैयारी में लग गए और नवनीत ने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में upsc की परीक्षा पास की| नवनीत की रैंक इतनी अच्छी थी कि उनको बिना किसी जदोजहद के IAS का पद मिल जाता लेकिन उन्होंने IPS बनना चाहा| उसके बाद वह लखनऊ के सबसे युवा एसएसपी बन गए|

नवनीत को अब एंकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से जाना जाता है, साथ ही नवनीत के जीवन पर फिल्म भी बन चुकी है

नवनीत अभी तक 60 से ज्यादा एंकाउंटर कर चुके हैं इसी कारण से उन्हें एंकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से जाना जाता है| इसी के साथ नवनीत को वर्ष 2001 में जीपीएस-जीआईएस आधारित ऑटोमैटिक व्हीकल लोकेशन सिस्टम (एवीएलएस) विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा 5 लाख रुपये के पुरस्कार से नवाजा गया था, साथ ही वर्ष 2005 और 2013 में नवनीत को पुलिस विभाग में दिये अद्भुत योगदान के लिए राष्ट्रपति पदक से भी नवाजा जा चुका है| नवनीत के व्यक्तित्व से लोग इतने प्रेरित थे कि नवनीत के जीवन पर एक फिल्म भी बना दी गई जिसका नाम है “भौकाल”|

- Advertisement -

Latest News

देश की पहली एमबीए पास सरपंच है छवि, अपनी मेहनत से बदल दी गांव की सूरत

नई दिल्ली : हमने किताबो, किस्से कहानियों में ऐसी चीजे जरूर पढ़ी होगी जिसमे युवा ने कॉरपोरेट नौकरी (corporate...
- Advertisement -

और भी पढ़े

- Advertisement -