Saturday, November 27, 2021
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नर्मदा को बचाने साइकिल यात्रा पर निकले बुजुर्ग, 2000 किलोमीटर तक चलेंगे साइकिल से

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मध्य प्रदेश की लाइफ लाइन कही जाने वाली नर्मदा नदी को बचाने के लिए ‘स्वच्छ नर्मदा सबकी जिम्मेदारी’ का संदेश लेकर बुजुर्ग साइकिल की यात्रा पर निकल गए हैं. इन बुजुर्गों की उम्र 60 से 70 साल के बीच हैं. 12 सदस्यीय बुजुर्गो की ये टीम नासिक महाराष्ट्र से आई है. ये बुजुर्ग 3300 किलोमीटर की यात्रा साइकिल से नाप रहे हैं. कोरोना महामारी के दौरान जब अधिकतर बुजुर्ग घरों में दुबके हुए ऐसे में ये लोग अपनी जान की चिंता किए बिना जीवनदायनी को बचाने के लिए आगे आए हैं.

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भारत की पांचवी सबसे बड़ी नदी नर्मदा अभी दूसरी नदियों के मुकाबले साफ़ है. ये नदी भी दूसरी नदी की तरह मैली ना हो जाए इसी चिंता के साथ ये बुजुर्ग यात्रा पर निकल गए हैं. इस यात्रा से जुड़े 68 वर्षीय ज्ञानेश्वर पाटिल का कहना है कि ये नदी हमारी मां की तरह है और मां की सेवा करना हर बेटे का कर्तव्य होता है. मां नर्मदा के प्रति हम गहरी आस्था रखते हैं. हमने यात्रा की शुरुआत मां नर्मदा की जयकारा लगाकर की. स्वच्छ नर्मदा सबकी नर्मदा का संदेश लेकर हम रवाना हुए हैं. इस टीम के लोगों का कहना है कि इस यात्रा के पीछे हमारा उद्देश्य लोगों को नर्मदा की स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है.

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इस यात्रा के दौरान प्रत्येक सदस्य साइकिल से 125 किमी तक चलेंगे. ये लोग 25 दिन में अपनी यात्रा पूरी कर लेंगे. आप जानकार हैरान हो जाएंगे कि इस उम्र में इन लोगों ने रोज 100 से 50 किलोमीटर साइकिल चलाकर पहले प्रैक्टिस की थी, तब यात्रा पर निकले थे. नदियों के प्रति इनका ये प्यार वाकई में काबिले-ए-तारीफ़ है. नदियों में प्लास्टिक की चीजें फेंकने से पहले आप इन बुजुर्गों का चेहरा जरूर एक बार याद कर लें. इस यात्रा के दौरान इन्होंने पंक्चर ठीक करने का सामान भी अपने पास रखा है. इनके पास आइकार्ड और फोम का बिस्तर भी है.

नर्मदा भारत की पांचवी सबसे बड़ी नदी है. इस नदी का उद्गम स्थल अमरकंटक है. जानकारों के मुताबिक अन्य नदियों के मुकाबले नर्मदा अभी साफ है. इसकी स्थिति दूसरी नदियों से बेहतर है.

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