Saturday, November 27, 2021
- Advertisement -

कोरोना के बाद भी इडली दादी ने नहीं बढ़ाए दाम, 1 रुपये में बेच रही हैं इडली

Must Read

देश की पहली एमबीए पास सरपंच है छवि, अपनी मेहनत से बदल दी गांव की सूरत

नई दिल्ली : हमने किताबो, किस्से कहानियों में ऐसी चीजे जरूर पढ़ी होगी जिसमे युवा ने कॉरपोरेट नौकरी (corporate...

आपकी लाइफ बदल देगा मिट्टी का ये ए. सी. , बिना बिजली और बिना खर्च के देता है ठंडक

नई दिल्ली : जिस तरह से गर्मी बढ़ती जा रही जा रही है एयर कंडीशनर का प्रयोग भी बढ़ता...

अंग्रेजी हुकूमत को चारों खाने चित्त कर दिया था बोरोलीन ने, आज भी बाजार में है इस क्रीम का दबदबा

बोरोलीन बाज़ार में एक जानी मानी एंटीसेप्टिक क्रीम की ब्रांड है। आज इतने वर्षों बाद भी बोरोलीन का बाज़ार...

कोरोना और लाॅकडाउन ने लगभग सभी के बिजनेस को डूबा दिया है, लेकिन कुछ लोगों ने ऐसे समय में भी हिम्मत नहीं हारी और अपना काम इमानदारी से करने में जुट गए. इन्हीं में से एक हैं तमिलनाडु की कोयंबटूर में रहने वाली 80 वर्षीय कमालाथल जो हर रोज़ मजदूरों को 1 रुपये में इडली बेचती हैं. पिछले साल सोशल मीडिया पर ये बुजुर्ग महिला अपने काम की वजह से काफी चर्चित हुई थीं.

कोरोना में इनके व्यवसाय को भी काफी नुकसान हुआ लेकिन इन्होंने अपने इडली के दाम आज भी नहीं बढ़ाए हैं. कोरोना की वजह से चीजों के दाम पहले के मुकाबले काफी बढ़ गए हैं. महिला का कहना है कि मैं अपने इडली के दाम 1 रुपये ही रखने की कोशिश कर रही हूं. 80 की उम्र में भी ये महिला सूरज के निकलने से पहले ही जग जाती हैं और नहा-धोकर पूजा-पाठ करके अपने काम में जुट जाती हैं.

Repersantive-pixbay

सांभर के लिए सब्जियां भी ये खुद काटती हैं. पिछले 30 साल से इडली बेचने का काम कर रही हैं. महिला को इस उम्र में भी इस काम को करने में कोई परेशानी नहीें होती है. पहल ये 50 पैसे में इडली बेचती थी. इन्होंने अपने इडली के दाम कुछ ही साल पहले बढ़ाए हैं.

Repersantive-pixbay

सुबह 8 बजे इनके घर के सामने लोगों की लाइन इडली खाने के लिए लग जाती हैं. सुबह 6 बजे से ये अपने काम में जुट जाती हैं. इडली का घोल तैयार करने में इन्हें लगभग 4 घंटे का समय लग जाता है. खमीर उठने के लिए इस घोल को वह रात में ही तैयार कर लेती हैं.

वह रोज 1000 से ज्यादा इडली बेच लेती हैं. उनके ग्राहक ज्यादातर मजदूर वर्ग के लोग होते हैं. इडली ब्रेकफास्ट के लिए सबसे सही रहता है. ये आसानी से पच जाता है. आप अपनी उन दादी या नानी को इनकी कहानी सुना सकते हैं, जो कहती हैं कि बेटा अब तो हमारी उम्र हो गई है.

 

- Advertisement -

Latest News

देश की पहली एमबीए पास सरपंच है छवि, अपनी मेहनत से बदल दी गांव की सूरत

नई दिल्ली : हमने किताबो, किस्से कहानियों में ऐसी चीजे जरूर पढ़ी होगी जिसमे युवा ने कॉरपोरेट नौकरी (corporate...
- Advertisement -

और भी पढ़े

- Advertisement -