Monday, April 19, 2021
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रिटायरमेंट के बाद भी यह शिक्षक नहीं हुए रिटायर, गांव में आज भी आदिवासी बच्चों को देते हैं शिक्षा

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New Delhi: रिटायरमेंट के बाद व्यक्ति हमेशा तीर्थ स्थल पर जाने के लिए योजना बनाते हंै। या फिर पूरा समय परिवार के साथ बीताने के लिए गुजारते हैं। लेकिन एक शिक्षक ऐसे भी हैं जो रिटायर होने के बावजूद भी रिटायर नहीं हुए हैं। वह गांव में आदिवासी बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। इस शिक्षक का नाम लोबिन सबर है। चलिए जानते के इनके बारे में

रिटायर शिक्षक हैं
लोबिन सबर एक शिक्षक हैं वह अब रिटायर हो चुके हैं। हालांकि वह अपने गांव में आदिवासी बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं, और रिटायरमेंट के बाद अपना समय बच्चों के साथ ही व्यतीत कर रहे हैं। वह फरवरी माह में रिटायर हुए थे।

बच्चों को खेलते देखा तो बदली सोच
बताया जाता है कि जब रिटायर शिक्षक अपने गांव में पहुंचे थे तो उन्होंने देखा कि कुछ बच्चे स्कूल जाने की बजाय खेल रहे थे। उन्होंने बच्चों के अभिवावक से पूछा कि बच्चे स्कू ल क्यों नहीं जा रहे हैं। फिर अभिवावक ने जो जवाब दिया उसे सुनकर शिक्षक काफी दुखी हुए। बच्चों के अभिवावक ने कहा कि किसान का बच्चा किसान ही बनेगा तो बच्चे खेलेंगे ही। उसी दौरान शिक्षक ने अभिववाकों की मानसिकता बदलने के बारे में सोच लिया।

परिवार वाले को मनाने लगे शिक्षक
बच्चों के परिवार को मनाने के लिए लोबिन सबर मनाने लगे। हालांकि कुछ वक्त के लिए निराशा हाथ लगी। लेकिन उन्होंने दो बच्चों को पढ़ाना शुरु कर दिया। धीरे-धीरे और भी बच्चे पढऩे के लिए आने लगे। अब उनकी क्लास में 36 बच्चे हैं।

मेरी जैैसी जिंदगी न गुजारे बच्चे, इसलिए उन्हें शिक्षित करना जरूरी
सबर बताते हैं कि उन्होंने अपने बचपन के दिनों में काफी कुछ सहा है। उन्हें आज भी याद है कि कॉलेज की फीस भरने के लिए उन्हें मजदूरी करनी पड़ी थी। इसलिए वह नहीं चाहते थे कि उनके गांव के बच्चों को कठिन परिस्थितियों से होकर गुजरना पड़े।

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