Friday, November 26, 2021
- Advertisement -

परिवार से बात करने के लिए सोलर पैनल से फोन चार्ज कर रहे हैं किसान, कहा, सरकार मदद नहीं कर रही

Must Read

देश की पहली एमबीए पास सरपंच है छवि, अपनी मेहनत से बदल दी गांव की सूरत

नई दिल्ली : हमने किताबो, किस्से कहानियों में ऐसी चीजे जरूर पढ़ी होगी जिसमे युवा ने कॉरपोरेट नौकरी (corporate...

आपकी लाइफ बदल देगा मिट्टी का ये ए. सी. , बिना बिजली और बिना खर्च के देता है ठंडक

नई दिल्ली : जिस तरह से गर्मी बढ़ती जा रही जा रही है एयर कंडीशनर का प्रयोग भी बढ़ता...

अंग्रेजी हुकूमत को चारों खाने चित्त कर दिया था बोरोलीन ने, आज भी बाजार में है इस क्रीम का दबदबा

बोरोलीन बाज़ार में एक जानी मानी एंटीसेप्टिक क्रीम की ब्रांड है। आज इतने वर्षों बाद भी बोरोलीन का बाज़ार...

New Delhi: दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों को रोजाना सुबह अपने परिवार से बात करनी होती है। परिवार से दूर आए किसानों को भी परिवार का हाल-चाल लेना होता है। ऐसे में मोबाइल फोन का चार्ज रखना और भी जरूरी हो जाता है। ऐसे में कैसे वह अपने फोन को चार्च कर रहे हैं, और कैसे अपने परिवार से बात कर रहे हैं, इसका जब जायजा लिया गया तो पता चला कि किसान सोलर पैनल के सहारे फोन चार्ज कर रहे हैं, वहीं कुछ किसान किसी दुकान व किसी ओर के सहारे फोन को चार्ज कर लेते हैं

किसान फोन को चार्ज करने के लिए जहां सोलर पैनल का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं ट्रैक्टर की बैटरी से भी चार्ज कर रहे हैं। यहां पर धरने पर बैठे किसान अमृत सिंह ने बताया कि सोलर प्लेट लेकर आए हैं, जिससे हम फोन चार्ज कर रहे हैं, क्योंकि फोन की बैटरी चार्ज नहीं रहेगी तो हम एक दूसरे से कैसे बात कर पाएंगे, बताते चले कि रोजाना किसान अपनी फोन की बैटरी चार्ज करते हैं, इसके बाद दूसरा कोई काम करते हैं

घर पर सब अकेले हैं, और हम कृषि कानून को लेकर धरने पर बैठे हैं, जब तक हम काले कानून को वापस नहीं लेते हम घर वापस नहीं जाएंगे। ऐसे में घर पर सब हमारा हाल चाल पूछने के लिए फोन करते हैं, इसलिए हम सोलर पैनल से फोन चार्ज कर रहे हैं जिससे हम परिवार के लोगों से संपर्क में रह सके

एक किसान ने कहा कि सरकार को सुविधा देनी चाहिए थी, लेकिन केंद्र सरकार हमे क्या सुविधा देगी वह तो हमारी मांग नहीं मान रही तो सुविधा देने की बात ही नहीं है। किसान बताते हैं कि हमे तकलीफ जरूर हो रही है, परंतु हम सब तकलीफ सह सकते हैं, लेकिन बिना कानून को वापस लिए घर नहीं लौटेंगे।

- Advertisement -

Latest News

देश की पहली एमबीए पास सरपंच है छवि, अपनी मेहनत से बदल दी गांव की सूरत

नई दिल्ली : हमने किताबो, किस्से कहानियों में ऐसी चीजे जरूर पढ़ी होगी जिसमे युवा ने कॉरपोरेट नौकरी (corporate...
- Advertisement -

और भी पढ़े

- Advertisement -