Sunday, May 16, 2021
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गरीबी के कारण बेचने पड़े थे घर-मकान, अब 5 कंपनियों की मालकिन बन कमाती हैं करोड़ों में

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समस्याएँ तो हर किसी के जीवन में आती हैं लेकिन बात उसी की होती है जो इन समस्याओं को अवसर में बदल कर अपनी जिंदगी को एक नई पहचान देता है और इन समस्याओं को हल करने में यदि कोई अपना हमारे साथ हो तो फिर तो सोने पर सुहागा वाली बात होगी| वैसे तो लोगों के लिए शादी करना सिर्फ एक कार्य पूर्ण करने जैसा बन गया है, लेकिन आज भी ऐसे कई लोग हैं जो शादी जैसे पवित्र रिश्ते को पूरी ईमानदारी के साथ निभाते हैं|

बहुत ही हिम्मत वाली हैं कृष्णा यादव

आज हम आपको कृष्णा यादव के बारें में बताने जा रहे हैं| कृष्णा उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में अपने पति के साथ रहती थी| कृष्णा की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी क्यूंकि कृष्णा के पति गोवर्धन जो बिज़नस करते थे उसमें उन्हें काफी घाटा हो गया था| जिसके बाद उनकी आर्थिक स्थिति और खराब होती चली गई| लेकिन गोवर्धन के साथ उनकी अर्धांगिनी थी, जिसने कभी गोवेर्धन के हौंसलों को टूटने नहीं दिया|

गरीबी के कारण बेचना पड़ा घर, दिल्ली आकर रहने लगी थी कृष्णा

गरीबी के कारण कृष्णा का घर –मकान बिक चुका था| उनके पति मायूस हो गए थे लेकिन तभी कृष्णा ने अपना फर्ज़ निभाया और अपने पति को संभाला साथ ही उन्हें किसी और शहर में चलकर रहने की सलाह दी| तब कृष्णा के पति ने उनकी बात मान ली और वह लोग दिल्ली आकर रहने लगे| दिल्ली आकर उन्होंने थोड़ी सी पट्टे की जमीन ली और उस पर खेती करना शुरू कर दिया| दोनों ने मिलकर खूब मेहनत की ताकि अपने भविष्य को सुधार सके|

सड़क के किनारे टेबल लगाकर बेचते थे आचार

जब उन्होंने अपनी उगाई हुई सब्जी बाज़ार में बेचना शुरू किया तो भी उन्हें ज्यादा मुनाफा नहीं हुआ| तब उन्होंने घर में ही आचार बनाना शुरू किया और उसे बाज़ार में बेचा| लेकिन वो भी इतना आसान नहीं था, क्यूंकि वह लोग जहां रहते थे वहाँ सुनसान इलाका था, तो कृष्णा के पति मायूस हो गए, तब एक बार फिर कृष्णा ने उन्हें समझाया और कहा कि हम अपने पास पानी के दो मटके रखेंगे ताकि लोग रुके और हम उन्हें अपना आचार चखा सके|

तिनके-तिनके को जोड़कर कृष्णा ने अपनी एक कंपनी शुरू कर दी

अब कृष्णा का आचार बिकने लगा था लेकिन कभी कभी आचार खराब भी हो जाता था तो उस वक़्त कृष्णा के पति उन्हें समझाते थे| उसके बाद टीवी में उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र के बारें में देखा और वहाँ से आचार बनाने की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी| उसके बाद कृष्णा ने “shri Krishna pickle” के नाम से अपनी एक कंपनी खोली और उसमें कुछ लोगों को काम देना भी शुरू कर दिया आज कृष्णा 5 कंपनियों की मालकिन बन चुकी है|

कृष्णा को उनकी मेहनत के लिए मिल चुके हैं कई अवार्ड

जिस कृष्णा के पास कभी रहने के लिए मकान नहीं था आज वह करोड़ों में कमाती हैं| इसके अलावा कृष्णा को एनजी रंगा अवार्ड, चैम्पियन अवार्ड से नवाजा जा चुका है और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी कृष्णा को सम्मानित कर चुके हैं|

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