Tuesday, May 11, 2021
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डिप्रेशन को कम करने के लिए पत्नी की मदद से पति ने खोली चाट की दुकान, बोले हिम्मत मिल रही है

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New Delhi: जब इंसान के पास काम नहीं होता, और परिवार चलाने के लिए पैसे नहीं होते तो अकसर इंसान डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। कुछ आत्महत्या करके अपनी जीवन की लीली समाप्त कर लेते हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जो डिप्रेशन का दर्द झेलने के बावजूद भी खुद को टूटने नहीं देते हैं। आज बात ऐसे ही एक शख्स की, जिनके साथ बीते छह माह में वो सब कुछ हुआ जो कोराना काल में नौकरी जाने के बाद दूसरे लोगों को हुआ था। शख्स का नाम संजय भाटिया है। वह दिल्ली के तिलक नगर के रहने वाले हैं। वह एक रेस्टोरेंट में काम करते थे, जिससे उनके परिवार को खर्च चलता था। लेकिन कोराना काल में नौकरी जाने के बाद उनकी नौकरी चली गई। लगभग छह माह तक उनके पास कोई काम नहीं था। वहीं परिवार का जिम्मा, और नौकरी नहीं होने से संजय छह माह के लिए डिप्रेशन से जूझते रहे। हालांकि अब उन्होंने अपनी चाट की दुकान खोल ली है, और खुद पर डिप्रेशन को हावी नहीं होने दे रहे हैं। संजय बताते हैं कि अब उन्हें अच्छा महसूस हो रहा है। इस चाट की दुकान खोलने में उनकी पत्नी ने भी मदद की है। आईए जानते हैं संजय भाटिया के बारे में।
क्या कहते हैं संजय भाटिया

संजय बताते हैं कि साल 2020 में वह एक जगह पर जॉब करते थे। वह एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर बड़ी बेटी और उनसे दो छोटे बच्चों को ख्याल रखते थे। उनकी पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा उनके ऊपर था। सबकुछ ठीक चल रहा था और इसी बीच लॉकडाउन लग गया। मैं जिस रेस्टोरेंट में काम करता था, वह बंद हो गया, बाकी काम के लिए तलाश की। लेकिन कहीं काम नहीं मिला।
मार्च से सितंबर सबसे कठिन समय

संजय बताते हैं कि उनके लिए मार्च से लेकर सितंबर माह के बीच का समय काफी कष्टदायक रहा। कहीं काम नहीं मिल रहा था और परिवार का खर्च चलाने के लिए पैसे खत्म हो रहे थे। हां एक जान-पहचान के मित्र थे जिन्होंने मेरी सहायता इस मुश्किल समय में की।
परिवार ने दिया सहयोग
संजय बताते हैं कि काम नहीं मिलने से मुझे काफी परेशानी हो रही थी। मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था। हां. इस दौरान परिवार में मेरी मां, पत्नी व बच्चों ने मेरा काफी सहयोग किया। उन्होंने मुझ पर भरोसा किया और विश्वास दिलाया कि मैं अपना खुद का कुछ अच्छा बिजनेस स्टार्ट करूं। क्योंकि मुझे कुकिंग का शौक था तो मैंने इसी दिशा में अपने कदम बढ़ाए

3 सितंबर को खोली गई चाट की दुकान
संजय बताते हैं कि उनकी पत्नी ने उन्हें काफी हौसला दिया। जिसकी वजह से हमने मिलकर 3 सितंबर 2020 को अपना चाट स्टॉल खोल दिया। इस स्टॉल के लिए संजय को महीने का 8 हजार रुपये देने पड़ते हैं।

स्टॉल पर स्पेशल आइटम भी
संजय बताते हैं कि उनके स्टॉल पर खासतौर पर दही भल्ले, पापड़ी चाट परोसे जा रहे हैं। संजय कहते हैं कि उनकी पत्नी भी सप्ताह में एक से दो बार आती हैं, संजय बताते हैं कि भले ही मैं पैसे कम कमाऊ। लेकिन लोगों को लजीज डिश ही खिलाऊंगा।

source the better india

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