Thursday, April 22, 2021
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साइकिल का पंचर ठीक करने वाला बना IAS अफसर , पिता की मौत के बाद छोड़ दी थी पढ़ाई

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New Delhi: ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग अभी भी अपने बच्चों को शिक्षा देने की बजाय उन्हें खेतों में काम करने के लिए जोर देते हैं। गांव के लोगों का कहना होता है कि किसान का बेटा, किसान नहीं बनेगा तो क्या बनेगा। लेकिन गांव के लोगों को यह बात समझनी होगी कि शिक्षा एकमात्र ऐसा हथियार है जिससे बच्चे शिक्षित होकर कोई भी युद्ध जीत सकते हैं। इसलिए उन्हें खेतों में काम करने की जगह शिक्षा देने के लिए स्कूल भेजा जाए। बहरहाल आज बात ऐसे एक आईएएस की जिन्होंने एक वक्त में साइकिल का पंचर भी लगाया था। लेकिन शिक्षा की बदौलत ही उन्होंने सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी पास कर आईएएस बने। चलिए जानते हैं इनके बारे में

2013 में यूपीएससी परीक्षा पास की
वरुण बरनवाल ने साल 2013 में 32वां रैंक लाकर यूपीएससी परीक्षा पास की। हालांकि एक वक्त वरुण के जीवन में ऐसी भी आया था , जब उन्होंने पढ़ाई छोडऩे का फैसला लिया था। फिर इसके बाद इस बदलाव की वजह से उन्होंने पढ़ाई शुरु की।
10वीं कक्षा में किया टॉप
जिस वक्त वरुण को पिता की जरूरत थी। उनके पिता की मौत हो गई। वहीं आर्थिक स्थिति भी काफी खराब हो चली थी। इसकी वजह से वरुण ने पढ़ाई छोडऩे का फैसला किया, और साइकिल की दुकान पर पंचर लगाने का काम शुरु किया। हालांकि इस बीच उनके 10वीं का रिजल्ट आउट हुआ, जिसमें उन्होंने टॉप किया था।

परिवार ने कहा, पढ़ाई जारी रखो
वरुण बताते हैं कि जिस वक्त 10वीं में मैंने टॉप किया। परिवार ने कहा कि मुझे पढ़ाई जारी रखनी चाहिए। वह बताते हैं कि फिर पढ़ाई तो शुरु की। लेकिन 10वीं व 12वीं के दिन काफी संघर्ष भरे थे। सुबह 6 बजे उठकर स्कूल जाना . फिर देर रात तक बच्चों को ट्यूशन देना डेली रूटिन वर्क बन गया था।

प्रिंसिपल ने माफ की स्कूल फीस
वरूण बताते हैं कि उनकी स्कूल की फीस स्कूल के प्रिंसिपल ने माफ कर दी। इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत की। सभी चीजों में टॉप किया। उन्होंने बताया कि इसके बाद दोस्तों की मदद से इंजीनियरिंग की, और यूपीएससी की परीक्षा देने के बारे में सोचा।

जब आए परिणाम तो आंखों में आए आंसू
वरूण बताते हैं कि इंजीनियरिंग के बाद अच्छी कंपनी में जॉब मिली थी। लेकिन मैंने तब तक यूपीएससी परीक्षा देने का विचार बना लिया था। हालांकि मुझे पता नहीं था कि कहां से इसकी शुरुआत करनी है। वरुण कहते हैं उनके भाई ने काफी मदद की। वह दिन याद कर आज भी वह भावुक हो जाते हैं जब यूपीएससी का परिणाम आया, और फोन पर भैय्या ने बताया कि तुमने 32वां रैंक हासिक किया है।

 

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