Thursday, April 22, 2021
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फिल्मी है ये कहानी, हर रोज कमाती थी 5 रुपए , देंखे कैसे बन गई 15 हजार मिलियन टर्न ओवर वाली कंपनी की मालिक

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

यदि आप कभी हार नहीं मानोगे और अपने संघर्ष को हथियार बनाते हुए खुद के भविष्य का निर्माण करने में जुट जाओगे तो आपको एक दिन जरूर उसके सुखद और उत्साहजनक परिणाम देखने को मिलेंगे। आज हम आपको एक ऐसी ही महिला से मिलाने जा रहे हैं, जिनका पूरा जीवन अभावों के साए में बीता। पिता ने उन्हें एक अनाथ आश्रम में छोड़ दिया, ताकि वह सही से खाना तो खा पाएं। मगर इस बच्ची ने जब होश संभाला तो वह बिना हार माने और अपने मजबूत इरादों के दम पर एक ऐसा इतिहास बनाने में सफल रहीं, जिससे आज लाखों लोग प्रेरणा ले सकते हैं।

हर रोज कमाती थी मात्र पांच रुपए

हम बात कर रहे हैं ज्योति रेड्डी नाम की उस महिला की, जिसने अपने मजबूत इरादों के दम पर 15 मिलियन डॉलर की कंपनी खड़ी कर दी। तेलगांना के वारंगल में कभी ज्योति प्रतिदिन पांच रुपए ही कमा पाती थी। उसे रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ता था। हर रोज संषर्घ करती ज्योति फिर अगले दिन के लिए तैयार रहती थी। लेकिन इस प्रेरणादायी महिला ने कभी भी हार नहीं मानी और आज उसने अपने हौंसले व बुलंद इरादों के दम पर इतनी बड़ी कंपनी खड़ी कर दी, जिसे देखकर हर कोई अचरज में है। ऐसी मजबूत इरादों वाली महिला ज्योति के बारे में जानना आपके लिए भी बेहद दिलचस्प रहेगा।

ज्योति को छोड़ दिया था अनाथाआलय में

ज्योति का जन्म वारंगल के एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके परिवार में पांच भाई बहन थे और वह दूसरे नंबर की थी। आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के चलते उनके पिता ने ज्योति व उनकी छोटी बहन को अनाथ आश्रम में भेज दिया। जहां उन्हें बेहद ही कठिन समय बिताना पड़ा। ज्योति ने आश्रम के साथ साथ अनाथआलय की सुपरीडेंट के घर पर काम भी शुरू कर दिया था, ताकि कुछ अतिरिक्त आय हो जाए। इस दौरान उनकी छोटी बहन बीमार हो गई और वह वापिस घर चली गई। मगर ज्योति अनाथालय में ही रही और कठिन जीवन जीते रही। पैसों की कमी की वजह से ज्योति दसवीं तक ही पढ़ाई कर पाई।

16 साल में हो गई थी ज्योति की शादी

इसके बाद 16 साल की उम्र में ज्योति की शादी कर दी गई। उसके पति सम्मी रेड्डी के पास केवल आधा एकड़ जमीन थी। ऐसे में ज्योति को घर चलाने के लिए खेतों में काम करना पड़ता था। जहां से उसे केवल पांच रुपए प्रतिदिन मिलते थे। ज्योति इस दौरान एक बच्चे की मां भी बन गई। मगर घर चलाने के लिए उसे दिन भर मेहनत मजदूरी करनी पड़ती थी।

इस तरह से की पढ़ाई

इस दौरान ज्योति ने नेहरू युवा केंद्र में वालंटियर के तौर पर काम शुरू कर दिया। हालांकि यहां कम पैसे मिलते थे, मगर ज्योति ने वहां रहते हुए पढ़ाई करनी भी शुरू कर दी। पैसों की कमी के चलते वह रात को सिलाई का काम भी करने लगी। इस तरह से ज्योति ने बीए तक की पढ़ाई कर ली। वर्ष 1994 में ज्योति को एक स्कूल में 398 रुपए की सेलरी पर टीचर की नौकरी मिल गई। मजेदार पहलू तो यह है कि ज्योति को स्कूल पहुंचने में दो घंटे का समय लगता था। इस दो घंटे में ज्योति ने रास्ते में साडी बेचने का काम भी शुरू कर दिया।

इस तरह से मिली पक्की नौकरी

इसके बाद ज्योति को 1995 में एक पक्की नौकरी मिल गई और उन्हें 2750 रुपए का वेतन मिला। यहां वह एक गर्ल चाईल्ड विकास अधिकारी के तौर पर नौकरी कर रही थी। इसके बाद उन्होंने पोस्ट गे्रजुएट की डिग्री भी हासिल कर ली। इस दौरान उसके संपर्क में उसकी एक रिश्तेदार आई, जोकि अमेरिका में रहती थी। उसकी लाईफ स्टाईल से प्रभावित होकर ज्योति ने भी अमेरिका जाने का फैसला कर लिया। इसके लिए उसने कठोर मेहनत शुरू कर दी। इसके लिए उसने अपने कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर चिटफंड का काम शुरू कर दिया,जिसमें उसे 25 हजार रुपए तक की इंकम हुई। इसके बाद उन्होंने कंप्यृूटर क्लास लेने के लिए हैदराबाद जाना शुरू कर दिया। इसी बीच किसी तरह से उन्होंने अपना पासपोर्ट भी बनवा लिया।

पासपोर्ट बनते ही अमेरिका पहुंच गई ज्योति

पासपोर्ट बनते ही ज्योति अमेरिका पहुंच गई। वहां जाकर उन्होंने 12 घंटे की नौकरी की,जिससे उन्हें हर रोज 60 डॉलर मिलते थे। इसी प्रकार से अमेरिका में कई छोटे मोटे काम करते हुए धीरे धीरे खुद को स्थापित करते गई। हालांकि इस दौरान उन्हें अमेरिका में एक स्थाई जॉब भी मिल गई, मगर अफसोस की वह अधिक दिन तक नहीं चली और ज्योति को फिर से छोटे मोटे काम करने पड़े।

पुजारी ने की भविष्यवाणी

करीब डेढ साल तक अमेरिका में संघर्ष करने के बाद ज्योति एक दिन वापिस भारत आई। यहां मंदिर में एक पुजारी ने भविष्यवाणी की वह खुद का बिजनेस करेगी। यह बात ज्योति के मन में घर कर गई। वापिस अमेरिका जाने के बाद ज्योति ने अमेरिका जाने वालों के लिए एक कंसलटेंसी कंपनी शुरू करने की योजना बनाई। इसके बाद ज्योति ने 40 हजार डॉलर का निवेश कर एक साफ्टवेयर कंपनी की स्थापना की।

ज्योति की कंपनी ने कमाया मुनाफा

ज्योति की यह कंपनी रिक्रूटमेंट और साफ्टवेयर सोल्यूशन भी विकसित करने लगी। जैसे ही कंपनी ने अपना काम शुरू किया तो उन्होंने अपनी रिश्तेदार को भी पार्टनर बना लिया। देखते ही देखते यह कंपनी तेजी से ग्राोथ करने लगी। पहले साल ज्योति की कंपनी को करीब 1 लाख 68 हजार डॉलर का लाभ हुआ और यह कंपनी जल्द ही 15 मिलियन के टर्न ओवर पर पहुंच गई। आज यह कंपनी अमेरिका में 100 लोगों को रोजगार दे रही है। ज्योति की यह कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। अमेरिका में ज्योति के चार और हैदराबाद में एक घर भी है। इसे कहते हैं कि यदि किसी काम को करने की ठान ली जाए तो फिर उसे पूरा करने में ईश्वर भी आपका साथ देते हैं।

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