Thursday, April 22, 2021
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कहते हैं कि प्यासे को कुंए के पास जाना पड़ता है, मगर ये शख्स इस तरह से कुंए को ही प्यासे के पास ले आया

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

कहते हैं कि प्यासे को कुंए के पास जाना पड़ता है, लेकिन एक शख्स ने अपनी मेहनत के दम पर कुंए को ही अपने घर के पास ले आया। पानी के लिए तरसते पूरे गांव को इससे काफी राहत मिली है। इससे पहले गांव की महिलाओं को पानी की तलाश में दो किलोमीटर से भी अधिक पैदल जाना पड़ता था। पानी लाने का काम उनके दैनिक जीवन का बड़ा हिस्सा बन चुका था। गांव में पानी का दूसरा कोई ऐसा साधन उपलब्ध नहीं था, इसलिए महिलाओं को हर रोज पैदल जाकर पानी लाना पड़ता था। यह कहानी है झारखंड के खूंटी जिले के गांव की।

पत्नी बीमार हुई तो पति ने खोद दिया कुंआ
इसी गांव में रहने वाली इमोन भी अन्य महिलाओं के साथ हर रोज दो किलोमीटर पैदल जाकर पानी लाया करती थी। एक बार वह पानी लाने की वजह से बीमार पड़ गई। यह देखकर उसके पति चाडा पहान ने सोचा कि वह क्यों ना पानी का पूरा स्त्रोत अपने घर के पास ही ले आए। पेशे से दिहाड़ीदार मजदूर चाडा ने पानी की तलाश शुरू कर दी। एक दिन वह पास ही पहाडी में लकड़ी लेने गया था, तभी उसे वहां से पानी निकलते हुए दिखाई दिया। यह देखकर इस दिहाड़ीदार मजदूर चाडा को सुझा कि क्यों ने पानी के इस पूरे स्त्रोत को वह अपने घर के पास तक ले जाए। यह सोचते ही उसने पूरी योजना बनाई और पूरे गांव वालों को पानी मुहैया करवाने के लिए कुुुंआ खोदने की सोची।

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एक साल के भीतर खोद दिया कुंआ

यह सोचते ही चट्टानों के बीच से निकलते हुए पानी को उसने अपने गांव तक ले जाने की पूरी योजना तैयार कर ली। एक साल के भीतर-भीतर चाडा ने अपने गांव में 25 फुट गहरा एक कुंआ खोद लिया । इस कुंए में चट्टान से पानी लाने में भी वह पूरी तरह से सफल रहा। चाडा ने बताया कि इस काम के लिए उसे पूरी मेहनत करनी पड़ी और अपने घर से महज पांच सौ मीटर के पास ही उसने पानी का यह बड़ा स्त्रोत पैदा कर दिया।
पचास परिवारों को मिला बड़ा लाभ
मीडिया से बात करते हुए चाडा ने बताया कि इस कुंए का लाभ गांव के पचास परिवारों को मिल रहा है। गांव के सभी लोगों को दूर से पानी लाने के लिए बड़ी मेहनत करनी पड़ती थी। यदि उसकी पत्नी बीमार ना होती तो उसे पानी लाने का आईडिया नहीं सूझता। चाडा ने बताया कि उसने हिम्मत नहीं हारी और बिना पंप व बिजली की मोटर के वह अपने घर के पास बने कुुंए में पानी लाने में सफल रहा। उसने बताया कि उनके गांव से पहाड़ी की ऊंचाई करीब 250 से 300 मीटर है, इसलिए ऊपर से पानी सीधे उनके कुंए में पहुंच जाता है। उसके अनुसार यह एक बड़ा और नामुमकिन सा काम था, मगर उसने हिम्मत नहीं छोड़ी और आज वह कामयाब रहा।
चाड़ा के हौंसले व मेहनत को सलाम
बता दें कि चाड़ा ने जिस जज्बे व मेहनत के दम पर यह कठिन काम कर दिखाया, वह लाखों लोगों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। जो लोग मेहनत व निष्ठा के दम पर हौंसला दिखाते हैं, वह बड़े से बड़ा काम करने से भी नहीं चूकते। चाडा ने इसी मेहनत व जज्बे के दम पर हौंसला दिखाते हुए इस कठिन चुनौती को आसान कर दिखाया। सिटीमेल न्यूज ऐसे मेहनती व कठिन परिश्रम करने वाले चाड़ा जैसे लोगों के हौंसले को सलाम करता है।

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