Saturday, November 27, 2021
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IT कंपनी के CTO पद को छोड़ शुरू किया खुद का बिज़नस, आज यात्रियों तक पहुंचाते हैं घर जैसा खाना|

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आप सभी ने कभी न कभी ट्रेन में सफर तो अवश्य ही किया होगा| लेकिन लंबे सफर में आपने हमेशा घर के भोजन को याद भी किया होगा| क्यूंकि ट्रेन का खाना घर के खाने की बराबरी कभी नहीं कर सकता| लेकिन अब शायद आपको इस समस्या से राहत मिल सकती है| क्यूंकि आज हम आपको एक ऐसे ही व्यक्ति के बारें में बताने जा रहे है, जो ट्रेन यात्रियों तक घर जैसा खाना पहुंचा रहे हैं| आइए जानते हैं इनके बारें में|

facebook/pushpindersingh

IT कंपनी में CTO के पद पर नियुक्त थे पुष्पेंद्र सिंह

कहते हैं कि सफल होने के लिए सफलता की इच्छा असफलता के डर से ज्यादा होनी चाहिए| पुष्पेंद्र का परिचय इस वाक्य से एक दम मिलता हुआ सा है| पुष्पेंद्र हमेशा से ही एक सफल व्यक्ति बनना चाहते थे| सफलता के इस रास्ते में पुष्पेंद्र के सामने जो भी समस्या आई पुष्पेंद्र ने उनका डट कर मुकाबला किया| वैसे तो आईआईटी बीएचयू और बिट्स पिलानी से पढ़े पुष्पेंद्र एक बड़ी आईटी कंपनी में सीटीओ के पद पर कार्यरत थे| लेकिन वह अपना कुछ बिज़नस करना चाहते थे|

लोगों के सामने रखा अपना विचार, लेकिन लोगों ने नहीं दिखाई रुचि

कहते है कि यदि आप सफलता पाना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको खुद पर विश्वास करना होगा कि आप कर सकते हैं| पुष्पेंद्र को हमेशा से खुद पर विश्वास था कि वह कुछ अच्छा कर सकते हैं| इसके लिए उन्होंने CTO पद से इस्तीफा दे दिया और अपना खुद का बिज़नस शुरू करने के लिए अलग-अलग तरीके खोजने लगे| एक बार वह ट्रेन में सफर कर रहे थे तो उन्होंने देखा कि ट्रेन यात्रियों को भोजन के अच्छे विकल्प नहीं दिए जाते और साथ ही खाने की गुणवत्ता भी अच्छी नहीं होती| इसी के बाद उन्होंने मन बनाया कि वह खुद इसी बात को ध्यान में रखकर अपना बिज़नस शुरू करेंगे

अपने बिज़नस के लिए ट्रेन में बाटें पर्चे

उसके बाद उन्होंने सोचा क्यूँ न वह अपनी खुद की ट्रेन में खाना पहुंचाने की सर्विस शुरू करें| इसके लिए उन्होंने रेलवे प्रशासन के लिए को अपना आइडिया बताया लेकिन वह उन्होंने उसमें कुछ रुचि नहीं दिखाई| तब पुष्पेंद्र ने सोचा कि उन्हें खुद ही कुछ करना होगा| इसके लिए उन्होंने कई रैस्टौरेंट में  आवेदन किया लेकिन कोई उनके साथ काम करने को तैयार नहीं था उसके बाद एक रैस्टौरेंट उनके साथ ट्रायल बेसिस पर काम करने के लिए मान गया| पुष्पेंद्र ने अपने साथ 2 अनुभवी और 2 गैर अनुभवी को जोड़ा और अपनी कंपनी travelkhana को शुरू किया| उसके बाद पुष्पेंद्र ने अपनी कंपनी के ट्रेन में पर्चे बांटने शुरू कर दिए|

पुष्पेंद्र के इस प्रयास को लोगों ने खूब पसंद किया|

जब पुष्पेंद्र ट्रेन में पर्चे बाँट रहे थे तो उन्होंने अपने साथी को फोन किया तब उन्होंने बोला कि सर आप फोन मत कीजिये क्यूंकि हमारे पास बहुत सारे फोन आ रहे हैं और लोग ऑर्डर भी दे रहे हैं| तब पुष्पेंद्र बहुत खुश हुए| आज पुष्पेंद्र ट्रेनों में लोगों तक घर जैसा खाना पहुंचा रहे हैं| आज उनके साथ उस रेलवे प्रशासन ने भी टाइ-अप कर लिया है जिसने कभी उनके साथ काम करने के लिए मना कर दिया था| आज travelkhana हवाईअड्डों के साथ–साथ अनेकों रेलवे स्टेशनों पर अपनी सर्विस देना शुरू कर दिया है और आज ज़्यादातर लोग travelkhana के इस प्रयास को सरहा रहे हैं|

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