Saturday, November 27, 2021
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किसान के कपड़े धोने दिल्ली आए कबड्डी प्लेयर मंजीत बग्गा, पंजाब से लाए हैं वांशिग मशीन

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सरकार से अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए पंजाब-हरियाणा के किसान लगभग 16 दिन से दिल्ली के विभिन्न बाॅर्डर पर धरनो दिए हुए हैं. केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानून के विरोध में किसान अपने घर.परिवार को छोड़कर ठंड में धरना दे रहे हैं. सरकार और किसानों के बीच कई बार बैठकें भी हुई लेकिन इन बैठकों का कोई नतीजा नहीं निकला. अन्नदाता का कहना है कि ये काला कानून हमारी आय को शून्य कर देगा. किसानों के इस आंदोलन पर राजनीति का रंग भी चढ़ने लगा है. कई राजनेता किसानों का समर्थन देने आगे आए हैं. नेता के अलावा कलाकार भी किसानों के हित के लिए अपने मंच से बोल रहे हैं. कई लोगों ने किसानों का समर्थन करते हुए अपने पुरस्कार भी लौटा दिए हैं. आंदोलनरत किसानों की लोग कई तरह से मदद कर रहे हैं. कुछ लोगों इनके लिए खाना तैयार कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोग इनके लिए हेल्थ चेकअप की भी व्यवस्था कर रहे हैं. अन्नदाता की सेवा करने में कोई पीछे नहीं हट रहा है.

मैदान पर अपने विपक्षी खिलाड़ी को धोने वाली वाले कबड्डी के कप्तान मंगी बग्गा सिंघु बाॅर्डर पर किसानों के कपड़ों धोकर उनकी सहायता कर रहे हैं. मंगी बग्गा ये कपड़े अपनी पूरी टीम के साथ धोते हैं. ये प्रदर्शन स्थल पर वाॅशिंग मशीन लेकर पहुंचे हैं. ये खिलाड़ी कपड़े धोने के अलावा लंगर के काम में भी जुटे हुए हैं. मंगी बग्गा ने कई अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ खेला है. मंगी बग्गा इससे पहले भी कई बार किसान के लिए आवाज़ उठा चुके हैं. मंगी बग्गा का कहना है कि हम खिलाड़ी बाद में हैं पहले किसान हैं. यहां सभी खेल को खेलने वाले खिलाड़ी अपनी सेवाएं दे रहे हैं. किसानों की मांग है कि सरकार कृषि कानून को वापस लें. किसानों का कहना है कि हम यहां पर 6 महीने तक भी आंदोलन कर सकते हैं. किसाना ने 8 दिसंबर को भारत बंद भी किया था.

ठंड से कई किसान बीमार भी हो रहे हैं. दिल्ली में बढ़ती सर्दी से वृदध किसान हाई बल्ड प्रेशर और सर्दी-जुकाम के शिकार हो रहे हैं. किसानों की सेवा करने के लिए अब उनके परिवार के लोग भी धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं. बता दें कि अभी तक सात किसानों की आंदोलन के दौरान मौत हो गई है. कुछ किसानों को डाॅक्टरों ने वापस घर जाने की सलाह दे दी है. किसान अपनी मांगों को मनवाने के लिए 24 नवंबर को दिल्ली की तरफ कूच करने आए थे

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