Friday, April 23, 2021
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कभी खाने को नहीं थी दो वक्त की रोटी, आज बन गए देश के सबसे कम उम्र के आईपीएस अफसर

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

आपने कई बच्चों को गरीबी में बदहाल जीवन यापन करते देखा होगा। कई बच्चे या तो होटलों पर काम करते हुए दिखाई दे जाएंगे या फिर रेडलाईट पर भीख मांगते हुए। ऐसे ही बच्चों के बीच में से ही कई ऐसे नौजवानों की कहानी भी सामने आती है, जोकि अपनी मेहनत व लगन के बल पर कई बड़े मुकाम हासिल करते हैं। आज हम आपको ऐसे ही एक बच्चे की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने कठोर परिश्रम के बल पर देश के सबसे कम उम्र के आईपीएस अफसर बनने का गौरव हासिल किया है।
सफीन दो वक्त की रोटी को थे मोहताज
गुजरात के रहने वाले सफीन हसन ऐसे शख्स हैं, जिन्हें कभी दो वक्त की रोटी के लिए भी मोहताज रहना पड़ता था। उनकी मां घरों में काम करती थी तथा शादी -विवाह जैसे आयोजनों में रोटी बेलकर बड़ी मुश्किल से अपने घर का चूल्हा चलाती थी। उनके पिता ठेले पर चाय व अंडे बेचा करते थे। गुजरात के पालनपुर में रहने वाले सफीन हसन ने अपना पूरा बचपन गरीबी व संघर्ष पूर्ण बिताया। इनके जीवन में कई ऐसे भी दिन आए, जब उन्हें बिना कुछ खाए पिए भी सोना पड़ता था। इन तमाम कठिनाईयों को झेलने के बावजूद भी सफीन ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और कभी भी उसे छोडऩे का ख्याल नहीं आने दिया।

गांव के इस स्कूल से हासिल की शिक्षा
सफीन ने अपनी प्राथमिक शिक्षा पालनपुर के एक छोटे से गांव कंणोदर में की। इसके बाद उन्होंने एक हाईस्कूल में दाखिला लेकर आगे की पढ़ाई जारी रखी। सफीन की मेहनत व लगन तथा उच्च शिक्षा हाासिल करने की ललक को देखते हुए स्कूल के प्रिंसीपल ने उसकी फीस माफ कर दी थी। हाईस्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद सफीन का मन इंजीनियरिंग की शिक्षा हासिल करने का था। जिसके लिए वह सूरत शहर में आ गए।

इस परिवार ने उठाया सफीन की पढ़ाई का खर्च
सफीन के जज्बे को देखते हुए गुजरात के एक संपन्न पोलरा परिवार ने उनकी शिक्षा का खर्च अपने ऊपर ले लिया। जिसके बाद सफीन ने नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया और इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने आईपीएस अफसर बनाने का सपना देखा, जिसके लिए वह दिल्ली आ गए।

ऐसे किया आईपीएस बनने का फैसला
दरअसल सफीन हसन के आईपीएस बनने की शुरूआत इस घटना से हुई। एक बार वह अपनी मौसी के साथ स्कूल में गए थे। वहां उन्होंने देखा कि सभी लोग स्कूल में आए एक अतिथि का जमकर स्वागत सत्कार कर रहे थे। सभी उनके सम्मान में आगे पीछे घूम रहे थे। जब सफीन ने अपनी मौसी से उनके बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि यह जिले के कलेक्टर हैं। यह पद देश सेवा के लिए ही बना होता है। यह देखकर ही सफीन ने भी तभी देश सेवा करने की ठान ली और अपने कठोर संघर्ष व जज्बे के दम पर देश में सबसे कम उम्र के आईपीएस अधिकारी बन गए। लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनें इस युवा आईपीएस अधिकारी सफीन हसन के जज्बे को सिटीमेल न्यूज सलाम करता है।

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