Saturday, November 27, 2021
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चीन नहीं अब अपने बिहार में ही उठा सकेंगे स्काइवॉक का लुत्फ, जानिए कब से ले सकेंगे स्काइवॉक का आनंद

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स्काइवॉक, क्या हुआ नाम सुनते ही आ गया न चीन का अत्यंत मनमोहक ग्लास ब्रिज याद| लेकिन यदि मैं आपसे कहूँ कि अब आपको स्काइवॉक के लिए चीन जाने की जरूरत नहीं है तो शायद आपको विश्वास न हो| लेकिन यह सौ फीसदी सच है| यदि आप आसमान में सैर करना चाहते हैं तो अब आपको चीन जाने की जरूरत नहीं है| अब आप अपने भारत में ही रहकर आसमान की सैर का लुत्फ उठा सकते हैं|

ANI

बिहार में होगा पूर्वोत्तर भारत का पहला ग्लास ब्रिज

जी हाँ आपने सही पढ़ा, अब अपने भारत के राज्य बिहार के नालंदा जिले में स्थित राजगीर में ग्लास ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है| जो अब लगभग बनकर पूरा हो चुका है| यह ग्लास ब्रिज चीन में स्थित स्काइवॉक ग्लास ब्रिज के मद्देनजर बनाया गया है| यह ब्रिज ऐतिहासिक बुद्ध मार्ग पर बनाया गया है| साथ ही बिहार में पर्यटन को भी इस ग्लास ब्रिज के माध्यम से बढ़ावा मिलेगा| पहले जो लोग चीन न जा पाने के कारण अपना स्काइवॉक करने का सपना पूरा नहीं कर पाते थे अब वह भी अपने सपने को खुली आँखों से पूरा कर सकेंगे|

250 फीट की ऊंचाई पर और पाँच पहाड़ियो से घिरा है बिहार का ग्लास ब्रिज

बता दें कि बिहार का यह ग्लास ब्रिज 250 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है| जो कि 5 पहाड़ियों से घिरा, 85 फीट लंबा और 6 फीट चौड़ा है| इस ब्रिज की मोटाई 40एमएम है और साथ ही यह तीन परतों में बनाया गया है| यह ब्रिज शुरू होने से पहले ही पर्यटकों को काफी लुभा रहा है| क्यूंकि जब आप इस 250 फीट ऊंचे ग्लास ब्रिज पर चलेंगे तो आपको ऐसा अनुभव होगा जैसे कि आप हवा में या आसमान में सैर कर रहे हैं| साथ ही ग्लास ब्रिज से नीचे देखने पर आपके रोंगटे भी खड़े हो सकते हैं| इस ग्लास ब्रिज पर एक बार में 40 लोग एक साथ सैर कर सकते हैं|

मुख्यमंत्री नितीश कुमार भी कर चुके हैं ब्रिज का दौरा

बीते दिनों बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने भीं इस ब्रिज का दौरा किया और बताया कि पहले उन्होंने ज़ू सफारी को केंद्र में रखकर रूपरेखा तैयार की लेकिन उसके बाद उन्हें महसूस हुआ कि यहाँ प्रकृति की समझ विकसित करने के लिए नेचर सफारी का भी निर्माण होना चाहिए| तभी उन्होंने यहाँ नेचर सफारी का निर्माण कराना शुरू करा दिया| अभी यहाँ कई काम पूरे होने बाकी हैं, लेकिन सीएम ने बताया कि ब्रिज और ज़ू सफारी का सफर अगले वर्ष मार्च महीने से शुरू हो सकता है|

भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है राजगीर

भारतीय इतिहास में भी राजगीर को विशेष स्थान प्राप्त है| सोन भंडार, गुफाएँ, गरम पानी के झरने, ब्रहमकुंड एवं विश्व शांति स्तूप भी राजगीर में ही स्थित है| साथ ही पुराने समय में नालंदा अपनी अकादमिक गतिविधियों के लिए भी विख्यात है| अब इसमें ज़ू सफारी और ग्लास ब्रिज भी जुड़ने जा रहा है| इस ज़ू सफारी में लोग ब्रिज और नेचर सफारी के साथ साथ रोप वे का भी लुत्फ उठा सकेंगे| इस रोप वे में काँच से बने 18 केबिन होंगे जिसमें एक केबिन में 8 लोग 750 मीटर की दूरी सिर्फ 5 मिनट में तय करेंगे| इसी के साथ साथ आप यहाँ अलग-अलग प्रकार के पेड़-पौधों, तितली पार्क और आयुर्वेदिक पार्क का भी आनद ले पाएंगे|

सिक्किम में है भारत का पहला ग्लास ब्रिज

भारत का पहला ग्लास ब्रिज सिक्किम के पेल्लिंग में चेन्रेजिंग की 137 फीट ऊंची प्रतिमा के सामने बना हुआ है| माना जाता है कि यह बुद्ध का सांसारिक अवतार है| हिमालय की पहाड़ियों के बीच स्थित इस ब्रिज की समुन्द्र तल से ऊंचाई 7200 फीट है|

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