Wednesday, May 12, 2021
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सड़क दुर्घटना ने बदली हॉकी प्लेयर की जिंदगी, अब गरीब बच्चों को प्रशिक्षण देकर कर रहे हैं अपना सपना पूरा

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New Delhi: कॉलेज के दिनों में वह एक अच्छा हॉकी खिलाड़ी था। वह आगे चलकर इस खेल के जरिए भारतीय हॉकी टीम में अपनी जगह बनाना चाहता था। लेकिन 20 साल पहले हए एक सड़क दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्ड़ी में चोट आई। डॉक्टरों ने साफतौर पर कह दिया कि वह अब जिंदगी में कभी भी हॉकी नहीं खेल पाएंगे। इस खबर ने उस उभरते खिलाड़ी के सपनों को तोड़ दिया था। इस शख्स का नाम है हरभूपिंदरजीत सिंह समरा। लेकिन उस शख्स ने इरादा बना लिया कि भले ही मैं अपने सपने को पूरा नहीं कर पाया। लेकिन मैं उन बच्चों की मदद करूंगा जो भविष्य में बेहतर हॉकी खिलाड़ी बन सकते हैं।

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कैसे हुई थी घटना
समरा बताते हैं कि वह अमृतसर के खालसा कॉलेज में पढ़ते थे। वह कॉलेज की हॉकी टीम के लिए चुने गए थे। साल 1999 में उनका कॉलेज फरीदकोट हॉकी टूर्नामेंट खेलने गया था। उन्होंने बताया कि जब वह अपने स्कूटर से मैदान पर पहुंच रहे थे, इसी दौरान एक जीप से उनकी टक्कर हो गई। इस टक्कर में मेरी रीढ़ की हड्डी में तीन जगहों पर इंजरी हुई। इस घटना के कुछ दिन बाद डॉक्टरों ने मुझे बताया कि मैं अब कभी हॉकी नहीं खेल सकूंगा। यहां मेरे हॉकी खेलने का सपना टूट गया। उन्होंने कहा कि मेरा हमेशा से सपना था कि मेैं अपने देश को इस खेल के जरिए रिप्रेजेंट करूं। जब मैंने ग्रामीण इलाकों में बच्चों को देखा तो मैंने सोचा कि क्यों न इन बच्चों के लिए कुछ करूं। इसके बाद मैंने एक संस्था बनाने की सोची, जिससे बच्चों को खेल सुधारने में मदद मिलेगी। बच्चे जब भारत के लिए हॉकी खेलेंगे तो मुझे लगेगा कि मैंने अपना सपना पूरा कर लिया। बताते चले कि समरा के इस पहल को काफी लोग सराहा रहे हैं।

image for representation (pixabay)

शादी के शगुन के पैसे को लगा दिया संस्था में
समरा बताते हैं कि उनकी शादी साल 2010 में हुई, इस दौरान मैंने अपनी पत्नी से अपनी इच्छा जाहिर कि। मेरी पत्नी ने मेरा सहयोग किया और शगुन में मिले 67 हजार रुपये को ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए लगाया गया। उन्होंने चार साल के बाद आरएचडीएस की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने इसके सात सेंटर और खोले। इन सभी सात सेंटरों पर बच्चों को हॉकी खेलने की कोचिंग दी जाती है। साथ ही बच्चों के खाने-पीने की व्यवस्था भी की जाती है, उन्हें घर से लाना फिर घर छोडऩे की सारी जिम्मेदारी इन्हीं सेटंर के द्वारा किया जाता है। इसके अलावा वह ग्रामीण बच्चों के लिए पीएचएल टूर्नामेंट भी आयोजित करवाते हैं। हालांकि कोविड की वजह से इस साल आयोजन नहीं हो सका।

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पीएचएल टूर्नामेंट में हिस्सा लेकर कई बच्चों का हुआ सलेक्शन
पीएचएल में खेलने वाले ग्रामीण बच्चों का नेशनल हॉकी टूर्नामेंट जैसे अंडर-16, नेशनल रूरल हॉक़ी, हॉकी इंडियन नेशलन अंडर-14 अंडर-17-अंडर-19 व नेशनल गेम्स और खेलो इंडिया नेशनल गेम्स में चयन हुआ।

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