Saturday, November 27, 2021
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साइबेरिया में है दुनिया का सबसे ठंडा स्कूल, ठंड में पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे

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सर्दियां शुरू होते ही बच्चों को स्कूल से छुट्टी मिल जाती है. वह घर में रहकर धमा चैकड़ी मचाते हैं और ठंड का आनंद उठाते हैं लेकिन ऐसी मौज हर देश के बच्चों को नहीं मिलती है. जी हां, साइबेरिया में बच्चों को ठंड में ही पढ़ना पड़ता है. साइबेरिया को दुनिया की सबसे ठंडी जगह में गिना जाता है. इस देश में पढ़ने वाले बच्चों को .50 डिग्री तापमान में क्लास लेनी पड़ती है. हड्डियां गला देने वाली ठंड में भी यहां छोटे बच्चे बैग टांगकर स्कूल पहुंचते हैं. सरकार स्कूल को बंद करने का आदेश तभी देती है, जब तापमान .52 डिग्री पहुंच जाता है. साइबेरिया के ओएमयाकोन नाम के शहर में स्थित ये स्कूल सबसे ठंडा स्कूल है. ये स्कूल 11 साल या उससे कम उम्र के बच्चों के लिए ही बंद होता है. ओएमयाकोन शहर में स्कूल के अलावा पोस्ट आॅफिस और बैंक जैसे जरूरी सेवाएं ही मौजूद है.

Representation image (pixabay)

इस इलाके में भी कोरोना वायरस का प्रकोप है. कोरोना वायरस के चलते स्कूल में बच्चों के अलावा माता-पिता का भी तापमान चेक किया जाता है. दिसंबर 2019 से कोरोना वायरस ने कोहराम मचा रखा है. इस बीमारी ने पूरी दुनिया को अस्त-व्यस्त कर दिया है. 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की इस वायरस से मौत हो गई है. सभी देश के डाॅक्टर कोरोना वैक्सीन बनाने की तैयारी में जुटे हुए हैं. कुछ देशों को वैक्सीन बनाने में सफलता भी मिल गई है.

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इस स्कूल की स्थापना सन् 1932 में हुई थी. एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते 8 दिसंबर को इस स्कूल में 9 बजे के आसपास तापमान माइनस 51 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इस तापमान को पढ़कर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बच्चे कितनी ठंड में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. इतनी ठंड में भी बच्चे स्कूल जाना नहीं छोड़ रहे हैं. इतनी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद बच्चों को शिक्षा मिल रही है. इस तापमान में काम करना बड़ा ही चुनौती से भरा हुआ है. ठंड में बच्चे कई बीमारियों के शिकार भी हो जाते हैं. डाॅक्टरों का कहना है कि बच्चों को ठंड में ज्यादा बाहर नहीं निकलने देना चाहिए.

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