Saturday, November 27, 2021
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बच्चों को शिक्षा मिले, इसलिए सीमा ने शुरु की 1 रुपये की मुहिम, 33 बच्चों की स्कूल फीस भरने का उठाया जिम्मा

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New Delhi: शिक्षा एकमात्र ऐसा हथियार है जिससे बच्चे कोई भी युद्ध जीत सकते हैं। और सभी बच्चों का यह अधिकार है कि अच्छी शिक्षा प्राप्त करे। हालांकि गरीबी के चलते कई मां-बाप अपने बच्चों को शिक्षा नहीं दिला पाते हैं। ऐसे में कई बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। बहरहाल आज हम आपको एक ऐसी युवती के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने बच्चों को प्राथमिक व उच्च शिक्षा दिलाने के लिए एक रुपये की मुहिम शुरु की। शुरुआत में थोड़ी कठिनाई जरूर आई। लेकिन इस युवती ने इस मुहिम के तहत एक-एक रुपया जोडक़र 33 बच्चों की शिक्षा दिलाने का जिम्मा उठाया है। युवती ने ठान लिया है कि इन बच्चों की 12वीं तक की पढ़ाई की सारी फीस वहीं भरेंगी। इस युवती का नाम सीमा वर्मा हैं। चलिए जानते हैं इनके बारे में
चार साल पहले शुरु किया मुहिम
सीमा बताती हैं कि उन्होंने इस मुहिम को 10 अगस्त 2016 को शुरु किया था। जिसके तहत वह एक-एक रुपया जोड़ती गई। जिसके बाद उन्होंने अब तक 33 बच्चों की फीस जमा की है। साथ ही उन्होंने इन 33 बच्चों के 12वीं तक की पढ़ाई का खर्चा भी उठाया है। इसके अलावा उन्होंने 12 हजार के लगभग बच्चों को स्टेशनरी भी मुहैया करवाई है।

यूपी के डिप्टी सीएम ने किया सम्मान
समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने वाली इस युवती को यूपी के डिप्टी सीएम ने भी सम्मान दिया है। बताया जा रहा है कि अब तक उन्होंने 40 से ज्यादा सम्मान मिले हैं। खास बात यह है कि उन्हें हाल में ही बेस्ट वूमेन ऑफ द छत्तीसगढ़ के नाम से सम्मान मिला है।

परिवार में कौन-कौन है
सीमा के परिवार में पिता कोल्ड फिल्ड में हैं,. मां हाउस वाइफ हैं, और घरेलू कामकाज करती हैं। उनका एक भाई है जो इंडियन आर्मी में देश की सेवा कर रहा है। सीमा खुद ग्रेजुएशन कर चुकी हैं, और एक रुपये की मुहिम से जुड़ी हुई है।

दिव्यांग दोस्त को ऐसे दिलाई ट्राय साइकिल
सीमा बताती हैं कि वह जब ग्रेजुएशन में थी तो उनकी एक दोस्त जो कि दिव्यांग थी। उसे ट्राय साइकिल दिलाने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया। उन्होंने इस संदर्भ में कॉलेज की प्रिंसिपल से बात की। लेकिन बात नहीं बनी तो सीमा ने ठान लिया कि अब कहीं से भी सहेली को साइकिल दिलाकर ही रहेंगी। उन्होंने जिला के कमिश्नर से बात की। जिसके बाद एक महीने के भीतर उसे साइकिल मिल गई।

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