Thursday, April 22, 2021
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कभी बार में नाचकर भरती थीं अपना पेट, आज ट्रान्सजेंडर होते हुए भी हैं सरकारी अफस

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“किन्नर” जो नाचकर, गाकर और तालियाँ बजाकर हम सभी के लिए दुआएं मांगते हैं, जब भी किसी घर में कोई खुशी आती है तो सबसे पहले किन्नरों को याद किया जाता है| लेकिन जब बात आती है उनकी खुशी या उनके सम्मान की तो, समाज को साँप सूंघ जाता है| यूं तो किन्नरों के सम्मान के लिए तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन आज भी किन्नर समाज अपने अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहा है| आज हम आप अपने लेख के माध्यम से एक ऐसी शक्सियत से मिलाने जा रहे हैं जिन्होंने न सिर्फ किन्नर समाज को गौरवान्वित किया है अपितु तमाम संघर्षों के बाद सफलता को हासिल कर मिसाल पेश की है| आइये जानते हैं उनके बारें में|

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आज हम बताने जा रहे हैं देश की ट्रान्सजेंडर नोडल अधिकारी अमृता सोनी के बारें में| अमृता, महाराष्ट्र के सोलापुर की रहने वाली हैं| अमृता का बचपन सामान्य बच्चों की तरह नहीं था, क्यूंकि वह एक किन्नर हैं| अमृता का किन्नर होना न सिर्फ समाज के लिए अपितु उनके परिवार के लिए गाली जैसा था| अमृता के किन्नर होने के कारण अमृता के पिता उनकी माँ को ताना मारते थे और उन्हें अपशब्द कहा करते थे| अमृता को किन्नर होने के कारण 16 साल की उम्र में घर से निकाल दिया गया था| लेकिन कहते हैं न एक अकेला मनुष्य चाहे तो वह कुछ भी कर सकता है और फिर अमृता के अंदर तो नर-नारी दोनों की शक्तियाँ समाहित थी, तो उनके आगे तो सफलता को नतमस्तक होना ही था|

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16 साल की उम्र में हुआ था रेप, पेट के लिए बार में नाचती थीं

घरवालों ने पहले अमृता को उनके चाच के घर भेज दिया कि जिम जाकर शायद वापस से आदमी बन जाए लेकिन जिस चाचा के भरोसे अमृता को भेजा गया उसी चाचा ने उनके साथ रेप किया| उसके बाद जब वह अपनी माँ के पास गई तो उन्हें घर से निकाल दिया गया| कोई भी कॉलेज उन्हें दाखिला देने को तैयार नहीं था, एक कॉलेज ने दाखिला दिया तो कहा कि आपको गे बनकर पढ़ाई करनी होगी| लेकिन अमृता को आगे पढ़ना था तो उनका यह स्वीकार करना पढ़ा| कॉलेज की फीस भरने और अपना पेट भरने के लिए वह बार में डांस किया करती थीं साथ ही इस मुश्किल घड़ी ने उन्हें सेक्स वर्कर तक बना दिया था| वह अपना पेट भरने के लिए एनजीओ को कंडोम बेचा करती थीं| उसके कुछ समय बाद कुछ भेड़ियों ने एक बार फिर अमृता को नोचा,जब अमृता अस्पताल गई तो उन्हें इलाज के लिए भी मना कर दिया गया साथ ही उन्हें अपशब्द भी कहे गए| आप सोचिए उस समय अमृता किस दौर से गुजर रहीं थी|

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Mba की डिग्री के साथ साथ मिली HIV पॉज़िटिव की रिपोर्ट

एक बार अमृता बीमार पड़ गई तो डॉ के पास टेस्ट कराने गई वहाँ उन्हें पता चलता है कि वह hiv से ग्रसित हैं और उसी दिन उनका एमबीए का परिणाम भी आता है जिसमें वह पास हो जाती हैं| लेकिन उसके बाद उन्होंने ठाना कि वह इससे भी लड़ेंगी और अन्य एचआईवी ग्रसित लोगों की मदद करेंगी| जिसके लिए उन्होंने खूब मेहनत की| अमृता के प्रयासों को देखकर छतीसगढ़ सरकार ने उन्हें नोडल अधिकारी का पद सौंपा| आज अमृता तीन राज्यों की क्षेत्रीय प्रोग्राम मैनेजर भी हैं| इसलिए कहते हैं कि यदि हौसलें बुलंद हो तो इंसान कुछ भी कर सकता है|

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