Saturday, November 27, 2021
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IPS मामा से प्रेरणा लेकर पांच बहनों ने बदल दी अपनी तकदीर, दो IAS , एक IRS और दो बहने बनी इंजीनियर

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New Delhi: कौन कहता है कि बेटी अफसर नहीं बन सकती और समाज में अपनी पहचान नहीं बना सकती। जो यह कहते हैं या तो उनकी सोच छोटी है या फिर वह नहीं चाहते हैं कि बेटी अफसर बने और अपने पैरों पर खड़ी हो। ऐसे लोगों की सोच का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यहीं लोग हमारे समाज में बेटियों पर तरह-तरह के तंज भी कसते हैं। बहरहाल, आज बात ऐसी पांच बहनों की, जिनके जन्म होने पर उनके माता-पिता को बहुत कुछ सहना पड़ा। लोग ताने मारते थे कि घर में पांच बेटी हुई , अब क्या करेगा, क्या इन्हें आईएएस बना देगा। यकीन मानिए लोगों के द्वारा मारे गए ताने अब हकीकत में साबित हुए हैं। पांच बेटियों ने लोगों के ताने को छोड़ अपने आईपीएस मामा से प्रेरणा लेकर समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है। पांच बहनों में से तीन ने यूपीएससी परीक्षा पास की। दो आईएएस बन चुकी हैं, और एक आईआरएस अधिकारी हैं। बाकी की दोनों बहने इंजीनियर बन चुकी हैं।

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चलिए जानते हैं इनके परिवार के बारे में
यूपी के बरेली जिले के एक गांव में चंद्रसेन सागर और मीना देवी के घर पांच बेटियों का जन्म हुआ। परिवार बेटी के जन्म पर खुश था। लेकिन लोग बेटी के जन्म पर चंद्रसेन को ताने मारते थे। हालांकि परिवार पर लोगों के ताने का कोई असर नहीं हुआ। अफसर बेटी के बारे में सागर बताते हैं कि बेटियों ने अफसर बनने के लिए कड़ी मेहनत की। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ने भी बेटियों को काफी मदद की है। वह बताते हैं कि उनकी बेटियो की पढ़ाई बरेली के सेंट मारिया कॉलेज से हुई। इसके बाद वह उत्तराखंड, इलाहाबाद और दिल्ली से आगे की पढ़ाई की। वह बताते हैं कि तीनों बहनों ने दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी की। उनकी बड़ी बेटी अर्जित सागर ने 2009 में अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास की। जिसके बाद वह ज्वाइंट कमीशनर कस्टम मुंबई में फिलहाल पोस्टेड हैं। अर्जित की शादी विजयवाड़ा में एक आईएएस अफसर से हुई। इसके बाद बेटी अर्पित को भी सफलता मिली, वह वर्तमान में वालसाड में डीडीओ पद पर हैं। तीसरे व चौथे नंबर की बहने इंजीनियर हैं। वे मुंबई व नोएडा में एक निजी कंपनी में काम करती हैं

मामा से मिली प्रेरणा
पांच बहनों में सबसे छोटी बहन आकृति सागर ने साल 2016 में यूपीएससी परीक्षा पास की। वह जल बोर्ड में डायरेक्टर के रुप में तैनात हैं। अफसर बन चुकी बेटियां बताती हैं कि उनके मामा पश्चिम बंगाल काडर के आईपीएस अधिकारी हैं। जिन्हें देखकर हमने भी अधिकारी बनने का सोचा था, जो कि अप पूरा हो चुका है। वह बताती हैं कि यूपीएससी परीक्षा के दौरान उनके मामा अनिल कुमार ने उनकी काफी मदद की थी। अगर उनका मार्गदर्शन नहीं मिलता तो शायद आज हम अफसर नहीं होते।

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