Wednesday, May 19, 2021
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शिक्षक ने लगाई जान की बाजी, दलालों के चुंगल से बचा ली 40 बच्चों की जान

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New Delhi: अच्छा शिक्षक अगर मिल जाए तो यकीन मानिए भविष्य बेहतर ही होता है।, और हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार शिक्षक को माता-पिता के बाद का दर्जा दिया गया है। माता-पिता तो हमे जन्म देते हैं, वहीं शिक्षक हमे जीवन जीने का तरीका बताते हैं। बहरहाल आज बात ऐसे एक शिक्षक की जिन्होंने क्लास में तो बच्चों को अच्छा ज्ञान दिया। लेकिन जब बच्चों के जीवन पर खतरा बना तो उन्होंने अपनी जान को दाव पर लगाकर दलालों के चुंगल से 40 बच्चों की जान बचा ली। राजस्थान के उदयपुर के यह शिक्षक हैं। इनका नाम है दुर्गा राम मुवाल। बताते चले कि राजस्थान के आदिवासी लोग जो राज्य के दक्षिण इलाकों में रहते हैं, वहां बाल तस्करी बड़े पैमाने पर की जाती है। कई घटनाओं से पता चला कि उदयपुर, बांसवाडा,  और प्रतापगढ़ जिलों में आदिवासी क्षेत्रों में गरीबी, शिक्षा के अभाव में बच्चों को दलालों के हाथों बेच देते हैं। हालांकि उदयपुर के सरकारी स्कूल के शिक्षक दुर्गा राम मुवाल निजी एनजीओ की मदद से आदिवासी बच्चों को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

आठ साल में 40 बच्चों की बचाई जान
बच्चों को दलालों से बचाने के लिए शिक्षक दुर्गा राम ने पुलिस विभाग की तर्ज पर अपना एक नेटवर्क बनाया है। जिसके तहत गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से तस्करी कर लाए बच्चों को बचाने का काम करता है। बताते चले कि दुर्गा राम ने आठ साल में 40 से अधिक बच्चों की जान बचाई है। वह बीते एक दशक से उदयपुर के एक आदिवासी गांव में शिक्षा दे रहे हैं।

बच्चों को बचाने का ऐसे आया ख्याल
दुर्गा राम उदयपुर से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित परगियापाड़ा गांव के एक सरकारी स्कूल में नौकरी करते हैं। उन्होंने वहां एक अजीब चीज देखी। उन्होंने देखा कि कुछ छात्र अचानक से स्कूल आना बंद कर दिए। जब वह उनकी जानकारी निकालते हैं तो पता चलता है कि बच्चों को बिचौलियों के द्वारा बाल श्रमिकों के रुप में काम करने के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने देखा कि उनकी क्लास में पढऩे वाली एक लडक़ी जब कुछ महीनों बाद लौटी तो उसकी हालात बेहद खराब थी। दुर्गा राम को लडक़ी की हालत ने अंदर से झकझोर दिया। जब उन्हें पता चला कि लडक़ी का शारीरिक शोषण हुआ है तो मैंने फैसला किया कि मुझे इन बच्चों के लिए कुछ करना चाहिए। इसके बाद मैंने जागरूकता अभियान शुरु किया।

जब पुलिस बनने का किया नाटक
दुर्गा राम दो साल पहले की एक घटना को याद कर कहते हैं कि उन्हें कुछ बच्चों का फोन कि वे आंध्र प्रदेश के एक फैक्ट्री में कैद हैं। बच्चों ने उन्हें अपने दलाल का नाम भी बताया। दुर्गा राम ने अपने मुखबिरों के माध्यम से बच्चों के दलाल की सारी जानकारी ले ली। उन्होंने बताया कि उन्होंने नकली पुलिस बन दलालों से बात की और धमकाया कि अगर जल्दी ही बच्चों को नहीं लौटाया तो अंजाम बहुत बुरा होगा। नकली पुलिस बनना कामयाब रहा और बच्चों को दलालों ने छोड़ दिया। दुर्गा राम ने हाल में ही गुजरात की दो लड़कियों को एक दलाल के चुंगल से बचाया है।

source the new indian express

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