Thursday, May 13, 2021
- Advertisement -

शिक्षक छात्रों को पढ़ा रहे हैं आत्मनिर्भर का पाठ, बच्चे खुद से बना रहे हैं चाक, चटाई और झाड़ू

Must Read

वैलंटाईन डे मनाने का अनोखा तरीका,मालगाड़ी के नीचे पहुंच गया प्रेमी जोड़ा, फोटो देखकर आएगा मजा

वैलंटाईन डे को प्यार के दिन के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में प्रेमी जोड़े...

अलग ही मिट्टी के बने तुषार, 17 साल तक असफलताओं से लड़े, अब बने जज

लोग दो या तीन साल की मेहनत के बाद सफल नहीं होते है तो वह टूट जाते है। लोग...

शहर घूमने सडक़ों पर निकला कोबरा तो रूक गया ट्रैफिक, घटना का वीडियो वायरल

वन्य जीवों के शहर में घूसने के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। कभी तेंदुआ तो कभी कोई...

New Delhi: स्कूल के क्लासरुम में यूं तो शिक्षक कई पाठ पढ़ाते हैं, लेकिन एक शिक्षक ऐसी भी हैं जो बच्चों को आत्मनिर्भर होने का पाठ पढ़ा रही हैं। मजे की बात यह है कि खुद को आत्मनिर्भर कर छात्र भी काफी खुश हैं। आत्मनिर्भर की कल्पना देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है। इस कल्पना को अब स्कूली छात्र खुद से सामान बना कर पुूरा कर रहे हैं, जो उनके ही पढ़ाई के दौरान इस्तेमाल होंगी। जैसे चाक, चटाई और झाड़ू। दरअसल, झारखंड के एक स्कूल में आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया जा रहा है। बच्चों को यह पाठ उनकी शिक्षक सपन कुमार पढ़ा रहे हैं। उनकी मदद से ही बच्चे अपने लिए चाक, चटाई और झाड़ू बना रहे हैं, जिसका इस्तेमाल क्लारुम में किया जा सके। ठुमका के दुमथर गांव में उत्क्रमित विद्यालय के प्रिंसिपल सपन कुमार ने हाल ही में पूरे गांव को एक क्लासरूम में बदलकर सुर्खियां बटोरी थीं। जहां दीवारें ब्लैकबोर्ड की तरह काम करती थी। जिस पर छात्र लाउडस्पीकर के माध्यम से शिक्षकों के द्वारा दिए गए होम वर्क को पूरा करते हैं। अब शिक्षक ने एक और पहल की है, जिसमें बच्चों को चाक, चटाई और झाड़ू बनाने में मदद कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

क्लास खत्म होने के बाद बनते हैं आत्मनिर्भर
शिक्षक सपन कुमार बताते हैं कि जब कक्षाएं खत्म हो जाती हैं, जब चाक, चटाई और झाड़ू का उत्पान किया जाता है। वह बताते हैं कि बच्चों को जीवन में सफल होने के लिए आत्मनिर्भरता के बारे में व उसके महत्व को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे चाक खरीदना महंगा पड़ा. इसलिए मैंने एक विकल्प के बारे में सोचा। कई दिन सोचने के बाद मैंने सोचा कि क्यों ने चाक को स्वयं उत्पादित करूं। क्योंकि कच्चा माल आसानी से मिल जाता था। उन्होंने बताया कि अब बच्चे रोजाना 200 से ज्यादा चाक का उत्पादन कर रहे हैं। साथ ही मटको के ताड़ के पत्तों का उपयोग कर बैठने के लिए चटाई बनाई जा रही है। छात्र बताती हैं कि उनके लिए भी यह एक अनुभव की तरह है।

Image source – EPS

- Advertisement -

Latest News

वैलंटाईन डे मनाने का अनोखा तरीका,मालगाड़ी के नीचे पहुंच गया प्रेमी जोड़ा, फोटो देखकर आएगा मजा

वैलंटाईन डे को प्यार के दिन के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में प्रेमी जोड़े...
- Advertisement -

और भी पढ़े

- Advertisement -