Saturday, November 27, 2021
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शहर की पहली महिला SDM बन, बदल दी लड़कियों के प्रति लोगों की रूढ़िबद्ध धारणा|

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वैसे तो कहा जाता है कि युवा देश का भविष्य होते हैं लेकिन कई लोग इन युवाओं में लड़कियों की गिनती नहीं करते हैं| क्यूंकि उन लोगों का मानना है कि जो लड़कियां अपने भविष्य के लिए कुछ नहीं कर सकती वह देश का भविष्य कैसे हो सकती हैं| आज वर्तमान में भी लड़कियों को कुछ नहीं समझा जाता| लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला एसडीएम के बारें में बताने जा रहे हैं जिसकी कहानी सुनकर शायद ऐसे लोगों की सोच में कुछ परिवर्तन आ जाए|

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अपूर्वा यादव मैनपुरी शहर की पहली महिला एसडीएम| अपूर्वा आज लाखों करोड़ों लड़कियों के लिए उनकी प्रेरणा बन गई है| अपूर्वा बचपन से ही लोगों की सोच को लड़कियों के प्रति बदलना चाहती थी| वह बताना चाहती थी कि लड़कियां भी बहुत कुछ कर सकती हैं और अपूर्वा ने अपनी मेहनत से यह कर दिखाया| अपूर्वा ने अपने सपने को कभी नहीं छोड़ा और उस पर ध्यान केन्द्रित रखा| हालांकि अपूर्वा को भी अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ा लेकिन उनकी मेहनत ने सभी समस्याओं को हरा दिया| आइए जानते है अपूर्वा के सफर के बारें में|

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पिता के तबादले के कारण पड़ता था पढ़ाई पर असर, लेकिन नहीं मानी हार

अपूर्वा ने बताया कि उनके पिता सरकारी कर्मचारी थे, जिसके कारण उनके नौकरी में तबादले होते रहते थे और इसी वजह से अपूर्वा की पढ़ाई पर भी असर पढ़ता था| कभी उन्हें अंग्रेज़ी मीडियम, कभी हिन्दी मीडियम में पढ़ाई करनी पड़ती थी लेकिन अपूर्वा ने हार नहीं मानी और अच्छे अंक से कक्षाएँ पास की| उसके बाद अपूर्वा ने इंजीन्यरिंग करने का मन बनाया| लेकिन बचपन से अपूर्वा कुछ बड़ा करना चाहती थी| हालांकि उन्होंने इंजीन्यरिंग में दाखिला ले लिया और उसे पूरा भी कर लिया|

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टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी मिली, लेकिन देश की सेवा के लिए छोड़ दी

अपूर्वा ने अपनी इंजीन्यरिंग पूरी की और उन्हें टाटा कंसल्टेंसी सर्विस में नौकरी मिली नौकरी करने के 3 साल बाद उन्हें अमेरिका जाने का अवसर मिला, लेकिन अपूर्वा के मन में देश की सेवा करने का भाव था और वह देश के लिए कुछ करना चाहती थी और उन लोगों की सोच बदलना चाहती थी जो सोचते हैं कि लड़कियां कुछ नहीं कर सकती| उसके बाद अपूर्वा ने उत्तरप्रदेश पीसीएस की तैयारी करनी शुरू कर दी, लेकिन पहले तीन प्रयासों में अपूर्वा असफल रहीं| तीन बार असफलता मिलने के बाद भी अपूर्वा के इरादे मजबूत थे उन्होंने चौथी बार परीक्षा दी और परीक्षा में 13वीं रैंक हासिल की और बन गई मैनपुरी शहर की पहली महिला एसडीएम| अपूर्वा बचपन से यह बताना चाहती थी कि लड़कियां भी बहुत कुछ कर सकती हैं और उन्होंने अपनी सफलता से यही संदेश लोगों तक पहुंचा दिया है| आज बहुत लोग अपूर्वा से प्रेरित होकर लड़कियों की शादी की बजाए उनके भविष्य के बारें में सोच रहे हैं|

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