Wednesday, May 12, 2021
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70 साल से नहीं थी गाँव में बिजली, लालटेन से पढ़ाई कर पूरा किया पिता का सपना और बन गए DSP

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जब भी हम किसी कार्य को करने की शुरुआत करते हैं तो हमारे सामने सबसे पहले सुविधाओं का अभाव आ जाता है| लेकिन इन अभावों में भी अपना रास्ता खोज लेने वाला व्यक्ति ही सफलता के शिखर तक पहुँच पाता है| आज कहानी एक ऐसे व्यक्ति की जिसने संसाधनों के अभाव में भी खुद को कमजोर न बनाकर अपने सपनों को पूरा किया और अपने परिवार को भी एक नई पहचान दी|

facebook/kishorekumarrajak

आइए जानते हैं किशोर की प्रेरणादायी कहानी

किशोर झारखंड में बोकारों के रहने वाले है और बहुत ही होनहार व्यक्ति हैं| बचपन से ही किशोर ने गरीबी को देखा था, क्यूंकि वह एक गरीब परिवार में जन्मे थे| उनके परिवार के पास रहने के लिए भी झोपड़-पट्टी जैसा घर था| बेशक किशोर का घर कमजोर था लेकिन किशोर के इरादे चट्टान से भी ज्यादा मजबूत थे| अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के लिए किशोर ने हर संभव प्रयास किया|

सरकारी स्कूल में करते थे पढ़ाई, साथ ही संभालते थे खेती-बाड़ी

किशोर के परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह किशोर को किसी निजी स्कूल में पढ़ाएँ| इसलिए उन्होंने अपनी शिक्षा सरकारी स्कूल से ही पूरी की थी| किशोर ने एक साक्षात्कार में बताया कि वह बचपन से बहुत मस्ती करते थे और स्कूल को बीच में छोडकर खेलने चले जाते थे और छुट्टी के वक़्त वापस स्कूल आ जाते थे| ये बात जब उनके गुरु को पता चली तो उन्होंने किशोर और उनके मित्रों को बहुत मारा और कहा कि मैं चाहता हूँ कि इस सरकारी स्कूल से कोई न कोई एक दिन सरकारी अफसर बने| यही बात किशोर के मन में घर कर गई| पढ़ाई के साथ साथ किशोर बकरी और गाय को चराने भी जाते थे|

IGNOU से की स्नातक, लेकिन हो गए फ़ेल

उसके बाद किशोर ने स्नातक की पढ़ाई के लिए IGNOU में दाखिला ले लिया और साथ ही साथ सरकारी परीक्षाओं की भी तैयारी कर रहे थे| उनके पिता उनसे कहते थे कि बेटा तुम बड़ा होकर IAS या IPS बनना और अपने पिता के सपने को किशोर ने भी अपना सपना बना लिया था| लेकिन स्नातक के अंतिम सेमेस्टर में किशोर फ़ेल हो गए| उसके बाद भी किशोर ने हार नहीं मानी और UPSC की तैयारी में जुट गए| उसके लिए वह अपनी बहन से किराये के पैसे लेकर दिल्ली आ गए और खर्चा चलाने के लिए बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाने लगे|

छोड़ दी थी UPSC की नौकरी

किशोर ने जब पहली बार यूपीएससी दिया तो वह पहले ही प्रयास में सफल हो गए और उन्हें असिस्टेंट कमांडेंट का पद मिला, लेकिन वह अपने गाँव के लिए कुछ अच्छा करना चाहते थे और अपने गाँव का विकास करना चाहते थे इसके लिए उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया और JPSC की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में उन्हें DSP का पद मिल गया| आज किशोर अपना और अपने पिता का सपना पूरा कर चुके है| अपने गाँव में किशोर एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो सरकारी अफसर बनकर देश की सेवा कर रहे हैं|

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