Friday, May 14, 2021
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घर-घर जाकर बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं इस स्कूल के हेडमास्टर, बोले बच्चों का हक है शिक्षा लेना

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New Delhi: शिक्षा पर सबका अधिकार है, और इसलिए आज हर वर्ग का बच्चा खुद को शिक्षित करना चाहता है। लेकिन मार्च माह से कोराना काल के बीच लगे लॉकडाउन की वजह से स्कूल व कॉलेज बंद हैं। 8 महीने से ज्यादा का वक्त बीत गया, स्कूली व कॉलेज के छात्र घर पर ही हैं। छात्रों को भी इस बात का इंतजार है कि स्कूल खुलेेंगे तो वह स्कूल जा सकेंगे। हालांकि देश के कुछ राज्यों ने स्कूल खोलने का निर्णय जरूर लिया। लेकिन कोराना महामारी को देखते हुए कुछ स्कूल संस्थान बंद कर दिए गए। बहरहाल, शिक्षण संस्थान कब खुलेंगे इसके बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी हो सकती है। परंतु हम आपको एक ऐसे शिक्षक के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने कोराना महामारी के बीच भी अपना शिक्षक धर्म निभाया है। इस शिक्षक ने घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाया और उन्हें कोराना संबंधित जानकारी भी दी है। शिक्षक का नाम है थेनवन रसेल, जो कोंडापेथन के सरकरी मिडिल स्कूल में हेडमास्टर के पद पर तैनात हैं।

जब स्कूल हुए बंद तो हेडमास्टर साहब ने ढूंढ़ निकाला यह रास्ता

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कोराना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच जहां शैक्षणिक संस्थानों ने मार्च महीने से स्कूल के दरवाजे पर ताला लगा दिया था। ऐसे में थेनवन रसेल ने तय किया कि वह अपने स्कूल के बच्चों के घर जाएंगे,और वहां उन्हें शिक्षा देंगे। इस काम को करने के दौरान उन्हें छात्रों के माता-पिता से भी रिस्पोंस भी सकात्मक मिला।

हेडमास्टर को राज्य पुरस्कार भी मिला
थेनवन एक ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें शिक्षा में अमूल्य योगदान के लिए स्टेट बेस्ट अवॉर्ड से भी नवाजा गया है। उनके पास 25 से ज्यादा पुरस्कार हैं, जो उन्हें शिक्षण के क्षेत्र में मिले हैं।

ऑनलाइन क्लास नहीं ले पाए छात्र
थेनवन बताते हैं कि कोराना महामारी के बीच शिक्षण संस्थानों ने बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने पर विचार किया और काफी हद तक इसे किया भी। लेकिन समस्या तब पैदा हुई जब अधिकतर छात्र ऑनलाइन क्लास नहीं ले पाए। क्योंकि छात्रों के पास स्मार्ट फोन नहीं था। इनमें ज्यादातर छात्रों के माता-पिता देहाड़ी मजदूर थे। जिनके लिए स्मार्टफोन खरीदना संभव नहीं था।

कोरोना में मजबूत करने के लिए शिक्षा बेहद जरूरी
थेनवन बताते हैं कि वह अपने छात्रों से रोजाना बातचीत करते थे, जिससे वह कोराना जैसी महामारी से खुद को लडऩे के लिए तैयार कर सके। साथ ही कोई शंका है तो उसे भी दूर कर सके।

दो गज दूरी के साथ पढ़ाई भी जरूरी
थेनवन बताते हैं कि वह और उनके सहयोगी शिक्षक एक स्थान पर छात्रों को एकत्रित करते हैं, साथ ही उनके बीच दो गज की दूरी भी मेनटेन कराई जाती है। साथ ही सभी छात्र मास्क भी लगाते हैं। इसके बाद नियमित पढ़ाई भी कराई जाती है, जिससे स्कूल व छात्रों के बीच जो खाई है वह ज्यादा न हो। उन्होंने बताया कि छात्रों के लिए उन्होंने एक स्ट्रीट लाइब्रेरी भी शुरु की। साथ ही छात्रों को फिट रखने के लिए उन्होंने क्रिकेट सहित कई खेल भी आयोजित किए, जिसमें स्कूली छात्रों ने भाग लिया।

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