Saturday, April 17, 2021
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मां-बाप ने नहीं की मदद तो सास-ससुर ने दिया सहारा, आज पत्नी के साथ करण बेचता है राजमा-चावल, बोला एक दिन रेस्टोरेंट खोलेंगे

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New Delhi: वक्त चाहे कैसा भी आए, मां-बाप कभी अपने बच्चों की मदद करने से पीछे नहीं हटते हैं। पिता एक वक्त के लिए मना भी करे, लेकिन मां कभी अपने बच्चों की मदद किए बिना नही रह सकती है। बहरहाल, आज बात ऐसे पति-पत्नी की हो रही है, जिन्होंने यह तय कर लिया है कि वह एक दिन अपना खुद का रेस्टोरेंट खोलेंगे। फिलहाल तब तक वह कार में ही खाने की छोटी सी स्टॉल लगाकर लोगों को राजमा-चावल खिला रहे हैं, और अपने लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर रहे हैं। पति पत्नी का नाम करण व अमृता है। वह फरीदाबाद के रहने वाले हैं, और दिल्ली के तालकटोरा लेन में राजमा-चावल का स्टॉल लगाते हैं। हालांकि शुरुआती दिनों को याद कर अमृता बताती हैं कि उनके यहां पर कोई खाने के लिए ग्राहक नहीं आता था। निराशा तो होती थी, लेकिन हमने यह तय कर लिया कि भले ही कितनी भी परेशानी हो, हम पीछे नहीं हटेंगे। आज इसी की फल इन लोगों को मिल रहा है। अब पहले की तुलना में स्टॉल पर खाना खाने के लिए अधिक संख्या में लोग आते हैं, और खाने की तारीफ भी कर रहे हैं, लोगों की ओर से मिल रहे फीडबैक से पत्नी अमृता बेहद खुश हैं। लेकिन इन दोनों की कहानी सिर्फ इतनी नहीं है, अमृता के पति करण कभी दिल्ली के एक सांसद के ड्राइवर थे। रहने के लिए फ्री में आवास था। लेकिन लॉकडाउन में नौकरी चली गई। जिसके बाद रहने का ठिकाना भी छूट गया। ऐसे में करण के माता-पिता ने भी मदद करने से मना कर दिया।

सास-ससुर ने की करण की मदद
करण बताते हैं कि वह दिल्ली में एक सांसद के यहां ड्राइवर की नौकरी करते थे। लेकिन नौकरी जब छूटी तो उनके पास काम नहीं था। हालांकि उन्होंने कई जगह नौकरी के लिए आवेदन तो दिया। पर काम कहीं नहीं मिला। ऐसे में उन्होंने अपना काम करने के लिए माता-पिता से मदद मांगी। पर उनके माता-पिता ने मदद करने से इंकार कर दिय.ा। करण यह बताते हुए भावुक भी हुए कि उनके माता-पिता ने उनका साथ बुरे वक्त में नहीं दिया। करण अपने सास-ससुर को धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने उनकी मदद की और स्टॉल खुलवाने में मदद की। करण अपनी पत्नी की तारीफ भी करते हैं कि जिसने उनका हमेशा साथ दिया।

क्या कहती हैं अमृता
अमृता बताती हैं कि शुरुआत में दिक्कतें आई। पर अब सबकुछ ठीक हैं। उन्होंने कहा कि वह रोजोना सुबह 11 बजे यहां पर आ जाती हैं, और दोपहर दो बजे तक सारा खाना खत्म होने के बाद चली जाती है। इसके बाद वह घर जाकर घरेलू काम करते हैं। वहीं उनके पति अगले दिन के लिए तैयारी में जुट जाते हैं। दोनों ने कहा है कि वह नौकरी की बजाय अब अपने बिजनेस को आगे ले जाएंगे। बताते चले कि अमृता की रसोई में 8 किलो चावल, ढाई किलो राजमा, दो किलो छोले, पांच किलो रायता और तीन किलो कढ़ी रहती हैं।

source dainik bhaskar

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