Monday, May 10, 2021
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अध्यापक की नौकरी छोडक़र बन गया किसान, 4 एकड़ से बन गया 40 एकड का मालिक, होने लगी लाखों की कमाई

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

खेती करके अभावों में जीवन यापन कर रहे इस किसान ने सोचा था कि वह अपने बेटे को पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाएंगे, लेकिन पिता को क्या पता था कि जो खून उनके अंदर दौड़ रहा है, वही खून उनके बेटे के भीतर भी है। बस पिता के सपने को हकीकत में बदलने से पहले ही बेटे ने भी पिता की राह पर चलते हुए किसान बनने का फैसला किया। देखते ही देखते आधुनिक तरीकों पर चलते हुए बेटा खेती का मास्टर बन गया। बेटे ने अपनी मेहनत व बुद्विमत्ता के बल पर 4 एकड़ की खेती को 40 एकड़ में फैला दिया।

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यह कहानी है गुरूप्रसाद की
यह कहानी है मध्यप्रदेश के बीजकवाड़ा में पैदा हुए गुरू प्रसाद पवार की। गुरूप्रसाद के किसान पिता के पास खेती के लिए जमीन तो थी, मगर उसके लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे। खेती के लिए सिंचाई की जरूरत पूरी करने के लिए भी उन्हें कड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। जिला छिंडवाडा के अंतर्गत आने वाले इस गांव में पानी की विकट समस्या थी, जिस कारण लोगों को खेती करने में बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता था।

पिता ने सोचा बेटे को बनाएंगे टीचर
बेटा गुरू प्रसाद पढ़ाई में अच्छा था, 10 वीं की परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल करने पर स्कूल के प्रिंसीपल ने जब उसे पुरस्कार दिया तो पिता ने सोचा था कि वह अपने बेटे को टीचर बनाएंगे। पिता के सपने को साकार करने के लिए गुरू प्रसाद ने एमए और डीएड में डिप्लोमा किया। इसके बाद वह वर्ष 2004 में टीचर बन गए और सरकार स्कूल में बच्चों का पढ़ाने लगे। उन्हें वेतन के रूप में 2500 रुपए प्रति माह मिला करते थे। घर मेें चार सदस्य थे, इस वेतन से उनका खर्च मुश्किल से चलता था। इसे लेकर गुरूप्रसाद चितिंत रहने लगे।

टीचर के साथ साथ करने लगे खेती
टीचर के साथ साथ उन्होंने खेती करना भी शुरू कर दिया। हालांकि उन्हें खेती का अनुभव बिल्कुल भी नहीं था। खेती से अधिक गुरू ने किताबें पढऩे में समय लगाया था। इसके बावजूद किताबी ज्ञान के आधार पर गुरू प्रसाद ने खेती करना भी शुरू कर दिया। 2005 में गुरू प्रसाद को पढ़ाने से अधिक इंकम खेती के कार्य में हुई। इस पर उन्होंने दोबारा विचार करना शुरू किया और परिवार को बताया कि जब थोड़ा समय खेती में देने से उन्हें इतनी आय हुई है तो पूरा समय इसमें लगाने का परिणाम सुखद हो सकता है।

टीचर की नौकरी छोड़ शुरू की खेती
परिवार वालों की सलाह के बाद उन्होंने टीचर की नौकरी छोड़ दी और कृषि के काम में रम गए। उन्होंने अपनी खेतों में लहसुन बोना शुरू कर दिया। जिससे उन्हें करीब दस लाख रुपए की इंकम हुई। गांव में पानी की कमी थी, इसके लिए गुरूप्रसाद ने कृषि विभाग से संपर्क साधा। जिसके बाद उन्हें ड्रिप इरीगेशन तकनीक के बारे में पता चला। इससे कम पानी में बेहतर खेती के परिणाम मिलने लगे और गुरू प्रसाद 15 एकड में अपनी फसल बोने लगे। इसके अलावा उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से रबी और खरीफ फसल और इसके बीच के समय में बोई जाने वाली फसलों की भी जानकारी हासिल की। जिसका उन्हें इतना लाभ मिला कि वह 2015 में स्वीट कार्न मक्का लगाने लगे।

इस तरह से गुरूप्रसाद बन गए 40 एकड़ के मालिक
इस तरह से बेहतरीन शिक्षा व कृषि वैज्ञानिकों की सहायता से लगातार उनकी फसल के बढिय़ा दाम मिलने लगे। वर्ष 2016 में गुरू प्रसाद 40 एकड़ खेत के मालिक बन गए। उन्होंने समय की बचत करते हुए रबी और खरीफ के साथ साथ सब्जी की पैदावार भी करने लगे।

लगातार बढऩे लगा मुनाफा
इस तरह से लगातार उनका मुनाफा बढ़ता गया। इस तरह से वह देखते ही देखते 4 एकड़ से 40 एकड़ जमीन के मालिक बन गए। इस कहानी का निष्कर्ष यह है कि आज के समय में जब किसानों को लगता है कि खेती फायदे का सौदा नहीं है तो गुरू प्रसाद जैसे किसान उनके लिए प्रेरणा बनकर सामने आते हैं, जिन्होंने अपनी सूझबूझ और कठिन परिश्रम से बदलाव की नींव तैयार की।

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