Thursday, May 13, 2021
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गांव में 70 साल तक नहीं आई बिजली, उस गांव का एक लड़का बना डीएसपी, पिता कोयले के खाद्यान में काम करते थे

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New Delhi: अकसर जीवन में सफलता उसे ही मिली है, जिसने अपना लक्ष्य तय कर रखा है। भले चाहे इस बीच कितनी भी कठिनाई क्यों न आए। आज बात ऐसे ही एक लड़के की। जिसके गांव में 70 साल तक बिजली नहीं आई, साथ ही अन्य सुविधाओं से वंचित रहा, पिता घर चलाने के लिए कोयले के खाद्यान में काम करते थे। लेकिन अपनी कड़ी मेहनत के बल पर वह आज डीएसपी बन कर अपने गांव का नाम रौशन कर रहा है, साथ ही उन युवाओं को सपने देखने का अवसर दे रहा है, जो यह सोचकर सपनों को देखना बंद कर देते हैं कि यह हमारे बस की बात नहीं है। इस लड़के का नाम है किशोर कुमार रजक, जो कि झारखंड के बोकारो के रहने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक किशोर का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जो बेहद गरीब था। इस कारण उन्हें बचपन के दिनों में काफी संघर्ष करना पड़ा। पैसे की तंगी भी थी और खेती करने के लिए जमीन नहीं थी, और न ही कोई दूसरा सहारा था, जिसकी बदौलत वह दूसरे शहर जाकर रोजगार तलाश सके। लेकिन घर चलाने के लिए पैसे की जरूरत तो पड़ती है न। किशोर के पिता ने धनबाद के कोयला खाद्यान में मजदूरी करनी शुरु कर दी। हां इस मजदूरी से पेट तो भरता था, लेकिन शिक्षा के लिए पैसे पर्याप्त नहीं थे

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सरकारी स्कूल में हुआ दाखिला
पैसे की कमी के कारण किशोर का दाखिला सरकारी स्कूल में कराया गया। जहां किशोर तो पढऩे जाते थे, लेकिन सरकारी स्कूल के टीचर समय पर आते ही नहीं थे। हां इस बीच किशोर थोड़े-थोड़े परेशान से रहने लगे। इस बीच उन्हें परिवार से सहयोग मिला, अच्छी शिक्षा व सरकारी नौकरी की प्रेरणा उन्हें उनके परिवार से मिली।

क्या कहते हैं किशोर के पिता
किशोर के पिता बताते हैं कि घर की स्थिति अच्छी नहीं थी। फिर भी किशोर अपने परिवार को इस गरीबी से निकालने के लिए लगातार पढ़ाई करते थे। वह खेती भी करते थे। वे अकसर गांव के बच्चों के साथ मिलकर पढ़ाई भी करते थे। उन्होंने बताया कि किशोर ने इतिहास विषय से स्नातक की पढ़ाई की। हालांकि वह तीसरे वर्ष में फेल हुए थे। हां. किशोर में एक अच्छी बात यह थी कि फेल होने पर निराश नहीं हुए और यूपीएससी की तैयारी में जुट गए।

यूपीएससी का ऐसा रहा सफर
यूपीएससी की तैयारी करने के लिए किशोर दिल्ली आए। उन्होंने अपने रिश्तेदारों से पैसे मांगे। वह जिस मकान में रहते थे, वहां बच्चों को पढ़ाते थे। जिससे वह अपना थोड़ा बहुत खर्च निकाल लेते थे। बताते चले कि साल 2011 में किशोर ने यूपीएससी की परीक्षा दी। उन्हें पहले प्रयास में ही सफलता मिली। असिस्टेंड कमान्डेंट के बाद उन्हें डीएसपी बनाया गया।

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