Monday, April 19, 2021
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प्रेरणादायक है ये कहानी, एक दूध बेचने वाले की बेटी ने रचा इतिहास, गाय के तबेले में पढ़ते हुए बनी जज

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

ये कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जोकि जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहते हैं। कहते हैं कि जो लोग इतिहास रचना चाहते हैं, उनके लिए चुनौतियां भी बड़ी ही होती हैं। आज हम आपके लिए एक ऐसी लडक़ी की कहानी लेकर आए हैं, जिसने अपनी गौशाला में पढ़ाई करते हुए जज की कुर्सी हासिल कर ली। इस दूध वाले की बेटी ने अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए कठोर संघर्ष और हाड़तोड़ परिश्रम किया है, यही वजह है कि आज वह जज बनकर न्याय की कुर्सी पर बैठी है।

यह कहानी है सोनल की

यह कहानी है 2018 में राजस्थान न्यायिक सेवा की परीक्षा देकर जज बनी 26 साल की सोनल की। सोनल ने इस परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया है। पंरतु इस मंजिल तक पहुंचने से पहले सोनल ने ऐसे दिन भी देखे थे, जब उसे अपना सपना टूटता हुआ नजर आने लगा था। पंरतु फिर उसने अपने हौंसले को इकठ्ठा किया और अपने सपने को साकार करने का दृढ निश्चय किया। सोनल की कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। सोनल अपनी पढ़ाई के साथ साथ अपने पिता के काम भी हाथ बंटाती थी। वह हर रोज सुबह चार बजे उठकर अपने पिता ख्याली लाल शर्मा को गायों का दूध निकालने , शेड की सफाई , गोबर इकठ्ठा करने और फिर दूध बांटने में पूरी मदद करती थी।

बीए, एलएलबी और एलएलएम में रही है प्रथम

सोनल ने बीए, एलएलबी और एलएलएम तक की परीक्षा भी प्रथम स्थान से पास की है। हालांकि सोनल का जज चुने जाने तक का रास्ता आसान नहीं था। लेकिन उसके संघर्ष का परिणाम सुखद रहा और उसे जज बनने का अवसर मिला। इससे पहले की बात की जाए तो सोनल टयूशन व मंहगी किताबों का खर्च उठाने में सक्षम नहीं थी। वह क्लास शुरू होने से पहले ही स्कूल पहुंच जाया करती थी, जहां वह लाईब्रेरी में बैठकर पढ़ाई किया करती थी।

खाली तेल का डिब्बा ही था उसकी मेज और कुर्सी

सोनल ने मीडिया को बताया कि उसके पास पढऩे के लिए अपनी गौशाला के एक कोने में एक खाली तेल का डिब्बे से बनी टेबल और कुर्सी थी, जिस पर बैठकर ही वह पढ़ाई किया करती थी। पढ़ाई के साथ साथ वह अपने मवेशियों की देखभाल भी किया करती थी। सोनल बताती है कि ज्यादातर समय उसकी चप्पल गोबर से ही भरी रहती थी। उसे पढ़ाने के लिए उसके माता पिता को कर्ज भी लेना पड़ा है। कई बार तो सोनल को अपने साथियों को यह बताने में भी शर्म महसूस होती थी कि वह दूध वाले की बेटी है। सोनल का कहना है कि अब उसे अपने मां बाप पर गर्व महसूस होता है और उसे यह कहते हुए कोई शर्म नहीं होती कि वह दूध वाले की बेटी है।

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