Tuesday, May 11, 2021
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यूपीः डाॅक्टरों को 10 साल तक देनी होगा सेवा, बीच में छोड़ी तो देने होंगे 1 करोड़

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कोरोना वायरस में धरती पर भगवान का रूप लिए हुए डाॅक्टरों ने जान की बाजी लगाकर लोगों को बचाया था. इस आपदा में अगर किसी ने अपनी जान पर बाजी लगाकर काम किया है तो वह हैं हमारे स्वास्थ्यकर्मी. इन डाॅक्टरों ने विषम परिस्थितियों में भी अपना मनोबल नहीं टूटने दिया, इसी का नतीजा है कि भारत में कई मासूमों को बचा लिया गया. यूपी में डाॅक्टरों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है. अब डाॅक्टरों को 10 साल तक सरकारी अस्पताल में अपनी सेवाएं देनी होंगी.

क्या है नया नियम
स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि पीजी करने के तुरंत बाद डाॅक्टरों को नौकरी ज्वाइन करनी होगी और 10 साल तक सरकारी अस्पताल में काम करना होगा. जिन डाॅक्टरों ने इस नियम का उल्ल्ंाघन किया उन्हें 1 करोड़ रुपये जुर्माने के तौर पर यूपी सरकार को देना होगा. सरकार का ये फैसला डाॅक्टरों को पसंद नहीं आ रहा है. इसके बाद अब कोई डाॅक्टर 10 साल तक अपनी नौकरी नहीं बदल सकता है. जिनको नौकरी बदलनी होगी तो 1 करोड़ रुपये का जुगाड़ करना होगा. इसके अलावा जिन डाॅक्टरों ने पीजी बीच में ही छोड़ दी तो उन्हें 3 साल के लिए बैन कर दिया जाएगा. उन्हें इन तीन सालों में एडमिशन भी नहीं मिलेगा.

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नीट में दी जाएगी छूट

कोरोना काल में डाॅक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार एक्शन में आ गई है. अब डाॅक्टरों को ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने के लिए नीट की परीक्षा में 20 अंक की छूट दी जाएगी. इस नियम में उन छात्रों को बड़ी राहत दी गई है, जो पीजी के साथ डिप्लोमा कोर्स करना चाहते हैं.

Repersantive (pixbay)

 

हड़ताल पर गए थे डाॅक्टर

आयुर्वेद के डाॅक्टरों को सर्जरी की अनुमति दिए जाने से नाराज देश भर के डाॅक्टरों ने शुक्रवार को 12 घंटे हड़ताल किया था. इन डाॅक्टरों का कहना था कि आयुर्वेद को आध्ुनिक चिकित्सा में जगह नहीं दी जानी चाहिए. दोनों को अलग-अलग रखना ही सही है. बता दें कि सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन ने एक बयान जारी करके कहा था कि आयुर्वेद के डाॅक्टर भी अब सर्जरी का काम कर सकते हैं.

आंकड़ों पर डालते हैं नज़र

साल 2019 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक यूपी सरकार में डाॅक्टर की स्थिति बेहद चिंताजनक है, यहां सरकारी डाॅक्टरों की बेहद कमी है. नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2015 के अनुसार राज्य में कुल 65,343 डॉक्टर पंजीकृत हैं जिनमें से 52,274 प्रैक्टिस कर रहे हैं. अगर यूपी की जनसंख्या की बात करें तो वो 21 करोड़ के आसपास है. ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि राज्य में लोगों के स्वास्थ्य का क्या हाल है. यूपी के लोगों का स्वास्थय राम भरोसे ही है. वैसे जिस रिपोर्ट का हमने जिक्र किया है वो 2015 का है, जिसे अब पांच साल होने को जा रहा है. लेकिन स्थिति में ज्यादा परिवर्तन नहीं आया है.

 

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