Monday, April 19, 2021
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170 से ज्यादा जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में ऑनलाइन ट्यूशन पढ़ा रहे हैं विट्ठल फैमिली

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New Delhi: शिक्षा एक ऐसा हथियार है, जिसे पाकर बच्चे किसी भी युद्ध को लड़ सकते हैं। जिसके पास शिक्षा है वह कभी भी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाता है बल्कि दूसरों को शिक्षा देने के लिए प्रेरणादायक बनता है। इसलिए तो कहा जाता है कि बच्चों को कुछ दो या न दो शिक्षा जरूर दो। जिससे भविष्य में वह अपने पैरों पर खड़े हो सके। कुछ इस तरह की सोच रखते हुए बेंगलुुरु में 82 साल के बद्रीनाथ व उनकी पत्नी इंदिरा विट्ठल (77) दोनों मिलकर गरीब जरूरतमंद बच्चों को फ्री में ऑनलाइन ट्यूशन देकर बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं। बताते चले कि बद्रीनाथ रिटायर सिविल इंजीनियर हैं और आईआईटी बॉम्बे से मास्टर ग्रेजुएट हैं।

पढ़ाने का ऐसे आया ख्याल
विट्ठल फैमिली में काम करने वाली हाउस मेड की बेटी को ट्यूशन पढ़ाने की जरूरत पड़ी। उसकी बेटी कक्षा में छह में पढ़ रही थी। बद्रीनाथ ने तय किया कि हम बच्ची को ट्यूशन पढ़ाएंगे। मैंने और मेरी पत्नी ने अपनी स्वेच्छा व फ्री में बच्ची को ट्यूशन दिया। इसके बाद ऑनलाइन क्लास में उनकी बेटी भी शामिल हुई। बद्रीनाथ विटट्ल बताते हैं कि वह इस बात से अंजान थे कि कर्नाटक में इतनी जल्दी 100 से ज्यादा क्लासें चलने लगेगी।

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विटट्ल परिवार ने जैसे ही फ्री में ट्यूशन देना शुरु किया। उनके पास और भी बच्चों के परिजन पहुंचे। साल 2014 के बीच कुछ परिवार के लोग पहुंचे, उन्होंने विट्टल परिवार से अनुरोध किया कि वह उनके बच्चों को भी ट्यूशन दे। क्लास में जहां महज दो छात्र दे वह अब आठ हो तुकी थी। बद्रीनाथ बताते हैं कि ज्यादातर बच्चे उस पृष्ठभूमि से आते थे जिनके माता-पिता दैनिक मजदूरी कर घर का खर्च चलाते थे।

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बद्रीनाथ बताते हैं कि जब देश में लॉकडाउन लगाया गया तो हमने बच्चों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं लगाई। क्योंकि लॉकडाउन में बच्चे घर तो आ नहीं सकते थे। इस मुहिम को आगे ले जाने के लिए हमने बच्चों के माता-पिता के स्मार्ट फोन का इस्तेमाल किया। जिस पर हम बच्चों को क्लासेज देते थे।

reprenstaion image (pixbay)

बच्चों के परिवार से कहा, स्मार्ट फोन की जरूरत है
बद्रनाथ के पास पहले की तुलना में अधिक बच्चे थे, लेकिन वह इन्ही में अपना समय बर्बाद नहीं कर रहे थे, उन्होंने उन माता-पिता से अनुरोध किया जिनके बच्चे ऑनलाइन क्लासेज सिर्फ इसलिए नहीं ले पा रहे थे क्योंकि उनके पास स्मार्ट फोन नहीं था।

ग्रामीण इलाकों में परिवार से मिले, और स्मार्टफोन जरूरत बताई
ग्रामीण इलाकों जैसे हावेरी, डोइडाबल्लापुर या गंगावती में कई बच्चों के परिवार के पास स्मार्ट फोन नहीं था। ब्रदी बताते हैं कि वह उनके परिवार के लोगों से मिले और अनुरोध किया कि वह बच्चों को स्मार्टफोन खरीद कर दे।

reprenstaion image (pixbay)

जब बच्चों को पढ़ाने के लिए दूसरे शिक्षक भी आए बद्रीनाथ की पहल पूरे शहर में देखने को मिल रही थी, अब बच्चों के साथ रिटायर शिक्षक भी बच्चों को पढ़ाने के लिए आगे आने लगे। खास बात यह रही कि सभी रिटायर शिक्षक अपनी मर्जी से बच्चों को पढ़ाना चाहते थे।

20 से ज्यादा शिक्षक बढ़ाते हैं
बद्रीनाथ बताते हैं कि उनके पास 20 से अधिक शिक्षक हैं जो विभिन्न विषय पढ़ाते हैं। इनमें कुछ बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के छात्र हैं. कुछ प्रतिष्ठित कॉलेज से रिटायर प्रोफेसर हैं, और अन्य इसरो के वैज्ञानिक हैं।

 

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