Friday, April 23, 2021
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झुग्गियों में बिताया अपना बचपन, आज बस्तियों रहने वाले बच्चों के लिए बन गए हैं मसीहा

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किसी ने क्या खूब कहा है कि “अमीरी मायने नहीं रखती साहब, कारनामे हैसियत बताते हैं|” आज के लेख में हम जिस शख्सियत के बारे में बताने जा रहे हैं उनका व्यक्तित्व इस वाक्य से मिलता हुआ सा है| आज के दौर में ज़्यादातर युवा अच्छी शिक्षा, अच्छी नौकरी पाकर अपनी जिंदगी में सैटल होने की चाहत रखते हैं लेकिन इन्हीं के विपरीत कुछ ऐसे युवा भी होते हैं जो सिर्फ अपने देश के लिए और देश की जनता के लिए कुछ करना चाहते हैं| इन्हीं युवाओं में से एक हैं सचिन भरवाल, जो आज अपनी शिक्षा को देश और देश की जनता के विकास में प्रयोग कर रहे हैं|


बहुत ही सराहनीय कार्य कर रहें हैं सचिन भरवाल
सचिन भरवाल दिल्ली के रहने वाले हैं| सचिन का बचपन दिल्ली की उन झुग्गियों में गुज़रा जहां मूलभूत आवश्यकताओं को पूरी करना भी मुश्किल होता है| लेकिन बचपन से ही सचिन के हौंसले बुलंद थे और उनके माता-पिता का साथ भी उनके साथ था| उन्हीं बुलंद हौंसलों और माता-पिता के साथ के बलबूते पर आज सचिन अनेकों ऐसे बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं जो अन्य कारणों से कभी स्कूल नहीं जा पाए और नशे या किसी गलत संगत में पड़ गए|

गुरु के साथ ने पढ़ाया-लिखाया और बना दिया समाजसेवी
सचिन बचपन से झुग्गियों में रहने के दर्द को महसूस करते थे| सचिन की शिक्षा एक सरकारी स्कूल से पूरी हुई है और उसी सरकारी स्कूल के एक गुरु ने हमेशा उनका साथ दिया| सचिन के लिए एक झुग्गी से निकलकर दिल्ली विश्वविद्यालय तक का सफर आसान नहीं था लेकिन उनके गुरु ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया| तभी से सचिन के मन में भी समाज सेवा की भावना पैदा होती चली गई|

आज अपने NGO के द्वारा करते हैं बच्चों को शिक्षित
सचिन ने अपना रेड फ़ाउंडेशन NGO वर्ष 2018 में दिल्ली के मयूर विहार के कोंडली गाँव में शुरू किया और “खिलता बचपन” नाम से बच्चों को शिक्षित करने का अभियान आरंभ किया| सचिन सिटीमेल को साक्षात्कार देते हुए बताते हैं कि आज अनेकों बच्चों के परिवार नौकरी की तलाश में दिल्ली में अपना आशियाना बना रहे हैं लेकिन इस “नई दिल्ली” में परिवार को नौकरी तो मिल जाती है लेकिन उनके बच्चों का भविष्य खराब हो जाता है क्यूंकि आधार शिक्षा न मिलने के कारण उन्हें किसी भी स्कूल में दाखिला नहीं मिलता है और उन बच्चों को मजबूरन कोई छोटा-मोटा काम करना पड़ता है| आज इन्हीं बच्चों को सचिन शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं|

आधार शिक्षा देने के बाद बच्चों का दाखिला मान्यता प्राप्त स्कूल में कराते हैं सचिन
बता दें कि वह अपने अभियान के तहत पहले घर-घर जाकर ऐसे बच्चों का सर्वे करते हैं और उनके अभिभावकों को समझाते हैं| उसके बाद वह बच्चों को आधार शिक्षा प्रदान करते हैं और उनके हुनर को जाँचते हैं उसके कुछ समय बाद सचिन इन बच्चों का दाखिला मान्यता प्राप्त स्कूल में करा देते हैं| बता दें कि सचिन जहां भी बाल मजदूरी देखते हैं तो उसके खिलाफ आवाज़ उठाते हैं और बच्चों के भविष्य को संवारते हैं|

कोरोना काल में करना पड़ा अनेकों समस्याओं का सामना
सचिन साक्षात्कार देते हुए बताते हैं कि कोरोना काल में उन्हें अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ा था| जिन बच्चों को वह आधार शिक्षा दे चुके थे वह कोरोना के कारण स्कूल नहीं जा पाए और वापस से वह उसी संगत में चले गए जहां से सचिन ने उन्हें बहुत ही मुश्किल से निकाला था| लेकिन सचिन ने हार नहीं मानी और वह निरंतर प्रयास करते रहे|

महिलाओं को भी शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं सचिन
बता दें कि सचिन “say no to thumbs” के नाम से महिलाओं के लिए भी अभियान चला रहे हैं जिसमें वह महिलाओं को भी शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं| वह अपनी टीम के साथ मिलकर उन सभी महिलाओं को साक्षर करने का प्रयास कर रहे हैं जो अपने हस्ताक्षर भी नहीं कर पाती या जिन्हें बैंक में जाकर फॉर्म भी किसी और से भरवाना पड़ता है|

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