Tuesday, January 19, 2021
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बेटे को IAS अफसर बनाने के लिए पिता ने बेच दिया घर, बेटे ने भी दो बार पास की UPSC

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

New Delhi : एक पिता ने अपने बेटे को IAS अफसर बनाने के लिए अपना घर बेच दिया और किराए के मकान में रहने लगे। बेटे ने भी अपने पिता का समर्पण भाव देखकर IAS अफसर बनने के लिए दो बार UPSC के पेपर दिए। दूसरी बार में बेटे ने अपने प्रदेश में UPSC में टॉप किया और देश भर में उन्होंने 26 वीं रैंक हासिल की। इस होनहार बेटे का नाम है प्रदीप सिंह, जोकि मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं।

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ऑल इंडिया में हासिल की 26 वीं रैंक

प्रदीप सिंह ने UPSC 2019 में ऑल इंडिया लेवल पर 26 वीं रैंक हासिल की है, जबकि वर्ष 2018 में उन्होंने UPSC में 93 वीं रैंक से पास हुए थे। तब वह मात्र एक नंबर की वजह से IAS अधिकारी बनने से रह गए थे। इसके बावजूद वह ऐसे पहले युवक थे, जोकि महज 22 वर्ष की आयु में IAS की बजाए इंडियन रेवून्य सर्विस में चुने गए और बेहद ही कम उम्र में IRS अफसर बन गए थे। पंरतु प्रदीप को तो IAS अफसर बनना था। इसलिए उन्होंने दोबारा से वर्ष 2019 में UPSC की परीक्षा दी और इस बार वह मध्यप्रदेश में जहां टॉपर रहे, वहीं देश भर में उनकी शानदार रैंक रही। इस तरह से प्रदीप ने UPSC परीक्षा को पास कर अपना व अपने परिवार का IAS अफसर बनने का सपना पूरा किया।

पिता ने बेटे को IAS बनाने के लिए बेचा घर

मध्यप्रदेश के इंदौर से ताल्लुक रखने वाले प्रदीप सिंह ने दिल्ली में रहकर ही आईएएस बनने की तैयारी की थी। अपने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए प्रदीप के माता पिता ने कड़ा संघर्ष किया है। उनके पिता मूलरूप से बिहार के रहने वाले थे। पंरतु 1992 में वह मध्यप्रदेश में आकर रहने लगे थे। वहां उन्होंने अपना एक छोटा सा मकान भी बना लिया था। पेट्रोल पंप पर नौकरी कर प्रदीप के पिता अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। प्रदीप को IAS अधिकारी बनाने के लिए पैसों की कमी ना आए, इसलिए उन्होंने अपना घर बेच दिया था तथा अपने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाया।

मां ने बेटे के लिए बेच दिए थे अपने गहने

बेटे को IAS बनाने के लिए किसी तरह की कमी ना आए, इसलिए मां ने भी बड़ा योगदान दिया। मकान बेचने के बाद भी जब पैसे कम पडऩे लगे तो प्रदीप सिंह की मां ने अपने गहने बेच दिए। तैयारी के वक्त जब प्रदीप सिंह दिल्ली जा रहे थे, तब उन्होंने अपने माता-पिता को यह आश्वासन दिया था कि वह इस बार UPSC क्लीयर करके ही वापिस आएंगे।

कलेक्टर बनने का देखा था सपना

इंदौर के डीएवीवी कॉलेज से स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद प्रदीप ने UPSC पास करने का सपना देखा था। उनका कहना है कि उनके परिवार का संघर्ष रंग लाया है और अब उनके संघर्ष का समय समाप्त हो गया है। प्रदीप सिंह का कहना है कि वह UPSC करने के बाद कलेक्टर बनना चाहते थे, उनका यह सपना आज पूरा हो गया है। कलेक्टर बनने के बाद वह जनहित के सभी कार्यों को प्राथमिकता देंगे।

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