Thursday, April 22, 2021
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20 साल के आदिवासी युवक ने दिहाड़ी मजदूर से यूरोप में बनकर दिखाया साफ्टवेयर इंजीनियर

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

एक ऐसा युवक, जो दिहाड़ी मजदूर से साफ्टवेयर इंजीनियर बन गया। यह सफर उसने ऐसे ही पूरा नहीं किया था ,बल्कि कदम-कदम पर चुनौतियों ने उसे हराने की कोशिश की। मगर वह हारने के लिए तैयार नहीं था। पढ़ाई के लिए मजदूरी करते हुए आखिरकार उसने सफलता का स्वाद चखा। यह युवक अब अपने आदिवासी इलाके से निकलकर विदेश में साफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर स्थापित होने में कामयाब रहा है।

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यह कहानी है केरल के आदिवासी जनजाति से आने वाले युवक बिनेश बालन की

यह कहानी है केरल के आदिवासी जनजाति से आने वाले युवक बिनेश बालन की। बिनेश इस प्रदेश के कासरगोड गांव का रहने वाला है। जब वह चौथी क्लास में था, तभी से कंप्यूटर पर गेम खेलते हुए उसे इससे लगाव हो गया। गेम खेलने के जुनून में वह हर रोज आठ किलोमीटर तक पैदल चलकर जाया करता था। इस छोटी से उम्र में ही वह कंप्यूटर के बारे में इतना कुछ सीख गया कि स्कूल के टीचर भी उससे इसकी जानकारी लिया करते थे।

इस तरह से चुनौतियों का सामना किया

10 वीं करने के बाद उच्च शिक्षा हासिल करते हुए बिनेश ने एमबीए की पढ़ाई पूरी की। फिर उसे सरकारी स्कॉलरशिप से विदेश जाने का मौका मिला। हालांकि यह इतना आसान नहीं था,जितना दिखाई देता है। इसके लिए बोलने चालने की दिक्कत के साथ साथ बिनेश को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कॉलेज में एडमिशन से लेकर स्कॉलरशिप हासिल करने में उसने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। उसने हर कदम पर चुनौतियों का सामना किया। मगर अंत में उसे विदेश जाने में सफलता मिल ही गई।

दिहाड़ी मजदूर से बना साफ्टवेयर इंजीनियर

मगर उसे इस तरह से सफलता मिली और बिनेश को यूके की सक्सेस यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल गया। उसने अपनी पढ़ाई पर आने वाले खर्च के लिए मजदूरी की। वह सुबह 4 बजे उठकर 8 बजे तक क्लिनिंग बॉय के तौर पर मजदूरी करता। इस तरह से कमाए गए रुपयों से उसने अपना खर्च चलाया। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में रूचि रखने वाले बिनेश ने अपने कुछ दोस्तों की मदद से एक साफ्टवेयर तैयार किया है, जोकि अब स्वतंत्र रूप से बैकिंग साफ्टवेयर के तौर पर काम कर रहा है। इस तरह से इस 20 साल के युवक ने आदिवासी होने के बावजूद अभूतपूर्व सफलता अर्जित की है।

 

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