Sunday, January 17, 2021
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बेहतरीन कार्य, रुपयों के अभाव में छोड़ी पढ़ाई, शुरू की अरबी की खेती, अब कमाते हैं 60 लाख रुपए सलाना

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

रामचंद्र एक ऐसे किसान हैं,जिन्होंने अपने भाईयों को खेती करने की बजाए दूसरे काम करने की सलाह दी। 12 वीं कक्षा तक पढ़े रामचंद्र के पिता भी किसान थे, मगर खेती से वह अपना घर भी मुश्किल से चला पाते थे। रामचंद्र तीन भाईयों में सबसे बड़े थे और वह नहीं चाहते थे कि उनके भाई खेती कर अपना जीवन खराब कर लें। इसलिए उन्होंने अपने भाईयों को खेती से दूर रहने की सलाह दी और खुद परिवार के इस काम को करने लगे। पंरतु रामचंद्र ने यह तय किया था कि वह अपने पिता की तरह से खेती नहीं करेंगे, जिसमें वह अपने परिवार को पाल भी ना सकें।


आधुनिक खेती करने का लिया फैसला
यह सोच कर रामचंद्र ने आधुनिक तरीके से खेती करने का निर्णय लिया और देखते ही देखते खेती के इस काम से लाखों रुपए कमाने लगे। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के कालका गांव के रहने वाले रामचंद्र पटेल की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। ये कहानी उन किसानों के लिए भी प्रेरणा दायक हो सकती है, जो खेती के काम को अब घाटे का सौदा मानते हैं। हालांकि रामचंद्र 12 वीं कक्षा के बाद भी पढऩा चाहते थे, मगर पैसों के अभाव में वह अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाए और मजबूरन खेती के काम में जुट गए।
खेती के काम को मुनाफे में बदला
लेकिन इस दौरान रामंचद्र ने इस व्यवसाय को मुनाफे में बदलने की सोची। इसके लिए सबसे पहले उनका ध्यान अपने ननिहाल पर गया। उनके मामा अरबी की खेती करते थे और संपन्न परिवार भी कहलाते थे। अपने मामा से बात करने के बाद रामचंद्र उनसे एक बोरी अरबी लेकर आए और उसे अपने खेतों में बोने का पक्का इरादा कर लिया। हालांकि इसके लिए गांव के लोगों ने उनसे मना किया और कहा कि कहीं ऐसा ना हो कि उनके खेत खराब हो जाएं। मगर रामचंद्र ने यह ठान लिया था और सोचा कि चाहे कुछ हो जाए वह अब अरबी की खेती ही करेंगे। यह ठानकर उसने अपने खेत में अरबी बो दी। पहली ही बार में रामचंद्र को सफलता मिली।
एक बोरी से पैदा की 40 बोरी अरबी
एक बोरी से रामचंद्र का 40 बोरी अरबी का उत्पादन हुआ। फिर तो उसने अपनी सारी जमीन पर अरबी की खेती शुरू कर दी। अब रामचंद्र अपने बीस एकड़ खेत में केवल अरबी का उत्पादन कर रहे हैं। पिछले एक साल में रामचंद्र ने अरबी की बंपर खेती की और शानदार उत्पादन हुआ, जिससे उन्हें 60 लाख रुपए से भी अधिक का मुनाफा हुआ। वह बताते हैं कि उनकी अरबी की सप्लाई मुंबई और दिल्ली, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में होती है। रामचंद्र के अनुसान अरबी बेचने में उन्हें कोई खास परेशानी नहीं हुई। जब उन्होंने मंडियों में संपर्क किया तो उनके उत्पादन की बिक्री शुरू हो गई।
खेतों से ही लोग ले जाते हैं अरबी
अब तो उनके खेतों से ही लोग अरबी खरीदकर ले जाते हैं। उनका कहना है कि अरबी का उत्पादन खरीफ और रबी के मौसम में भी होता है। इसकी खेती के लिए लाल दोमट मिटटी बहुत लाभकारी रहती है। उनके अनुसार एक एकड़ में चार से पांच ट्राली गोबर की खाद की जरूरत होती है, इसके अलावा रसायनिक खाद का भी प्रयोग किया जा सकता है। उनके अनुसार अरबी की खेती एक फायदेमंद काम है। इससे लाखों रुपए की कमाई की जा सकती है। उनके अनुसार शहरी क्षेत्रों में अरबी के पतों की भी मांग रहती है। इस सब्जी की खेती के साथ साथ धनिया और दूसरी सब्जियां भी आसानी से उगाही जा सकती हैं। रामंचद्र को इस उत्पादन से इतना लाभ हुआ कि वह अब दूसरे किसानों को भी इसके प्रति प्रेरित करते हैं।

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