Sunday, April 18, 2021
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बर्फ में फंसे मां और नवजात को सेना के जवानों ने जिंदा बचाया, 6 किलोमीटर पैदल चलकर सुरक्षित घर पहुंचाया

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भारतीय सेना अपनी दरियादिली के लिए जानी जाती है। सेना के पराक्रम से तो हर कोई वाकिफ है ही साथ ही जवानों के मानवता के हजारों किस्से इतिहास में दर्ज हैं। ऐसा ही एक और मानवता का किस्सा सामने आया है। जिसमें भारतीय सेना के जवानों ने एक मां और उसके बच्चे को नया जीवन दिया है। इस रियल किस्से के बाद से सेना के बहादुर जवानों की मानवीय चेहरे की मिसाल दी जा रही है।

इस तरह से बचाया मां और बच्चे को

देश के वीर जवानों ने अपनी जान को जोखिम में डालकर एक नवजात बच्चे और उसकी मां को बचाया है। सेना के जवानों ने भारी बर्फ में फंसे मां और बेटे को बचाने के लिए खुद की जान को दांव पर लगा दिया। जवानों को जैसे ही सूचना मिली तो वह फौरन वहां पहुंच गए और मां व बच्चे को अपने कंधों पर लादकर 6 किलोमीटर तक पैदल चलकर उनकी जान बचाने में सफल रहे।

Twitter/chinar corps -Indian army

 कुपवाड़ा जिलेकी है ये घटना

यह घटना जम्मू कश्मरी के कुपवाड़ा जिले की है। इस इलाके में एक अस्पताल में दोनों मां-बेटे बुरी तरह से फंस गए थे। इन दोनों को भारतीय सेना के जवानों ने अपने कंधे पर बिठाकर 6 किलोमीटर तक का सफर तय किया। जवानों की इस मेहनत की बदौलत ही दोनों मां बेटे सुरक्षित निकाल लिए गए। भारतीय सेना ने इस किस्से को अपने टवीटर हैंडल के जरिए बयान किया है।

डिलीवरी के बाद हुई थी मां-बच्चे की छुटटी

न्यूज एजेंसी एएनआई ने जानकारी दी है कि दर्दपोरा निवासी फारूक की पत्नी खसाना ने अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया था। बच्चे का जन्म होते ही इलाके में भारी बर्फबारी शुरू हो गई। जिसमें दोनों बुरी तरह से फंस गए। जैसे ही आर्मी को इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने अपना फर्ज निभाते हुए दोनों मां-बच्चे को वहां से सुरक्षित निकालकर उनके घर पहुंचा दिया। फारूक के एक नजदीकी रिश्तेदार ने बताया कि इस घटना में भारतीय सेना की 26 आरआर बटालियन के जवानों ने उनकी पूरी मदद की। दोनों को ना केवल सुरक्षित बाहर निकाला, बल्कि उन्हें सही तरह से घर भी पहुंचाया। इसके लिए हम उनका बहुत आभार जताते हैं।

ये है सेना का मानवीय चेहरा

भारतीय सेना के चिनार कोर के टवीटर हैंडल पर इस घटना की पूरी जानकारी दी गई है। भारतीय सेना के जवानों ने कैसे दर्दपोरा के इस बर्फीले इलाके में जाकर मां और बच्चे को पूरी तरह से सुरक्षित निकाला। आर्मी के जवान 6 किलोमीटर तक पैदल चले और दोनों को ठीक तरीके से घर पहुंचाने में मदद की। बता दें कि जम्मू कश्मीर में तैनात आर्मी के जवानों को जब भी अवसर मिलता है, वह संकट में घिरे लोगों की मदद के लिए सामने आते हैं। ऐसे अनेक सच्चे किस्से हैं, जब लोगों की मदद के लिए आर्मी के जवान अपनी जान को जोखिम में डालने से भी पीछे नहीं हटते।

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